Blockchain Technology in Hindi – ब्लॉकचेन तकनीक क्या है?

फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी से जुड़े आज के इस लेख में आगे विस्तार से चर्चा करेंगे ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के बारे में, जानेंगे ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी क्या है, यह कैसे काम करती है, इसका इस्तेमाल किन-किन क्षेत्रों में किया जा सकता है तथा आने वाले दिनों में यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को कैसे बदल सकती है?

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी क्या है?

हालिया दौर में टेक्नोलॉजी मानव जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुकी है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रक्षा, अर्थव्यवस्था जैसे कई क्षेत्रों में यह दिनों-दिन अपने पाँव पसार रही है। इसी का एक अत्याधुनिक रूप ब्लॉकचेन (Blockchain) वर्तमान में हमारे सामने है, जिसके कुछ अनुप्रयोगों (Applications) में एनएफटी एवं क्रिप्टोकरेंसी मुख्य रूप से शामिल हैं।

ब्लॉकचेन, टेक्नोलॉजी का एक आधुनिक रूप है, जिसकी सहायता से किसी भी प्रकार की सूचना या डेटा का एक विकेंद्रीकृत रिकॉर्ड (Ledger) तैयार किया जा सकता है। यह रिकॉर्ड सूचनाओं के अलग-अलग ब्लॉक की एक श्रंखला या चेन के रूप में होता है, इसीलिए इस तकनीक को ब्लॉकचेन (Blockchain) नाम दिया गया है।

ब्लॉकचेन में स्टोर डेटा के विकेंद्रीकृत होने का अर्थ है कि, यह डेटा किसी एक स्थान जैसे डेटा सेंटर में न होकर ब्लॉकचेन नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के पास मौज़ूद होता है, जिसके चलते इसमें बदलाव करना संभव नहीं होता और यहाँ स्टोर डेटा अत्यधिक सुरक्षित रहता है। ब्लॉकचेन तकनीक की शुरुआत साल 1991 में स्टुअर्ट हैबर और डब्ल्यू. स्कॉट स्टोर्नेटा द्वारा की गई तथा पहली बार इसका प्रयोग साल 2009 में क्रिप्टोकरेंसी “बिटकॉइन” के लेन-देन में किया गया।

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?

ब्लॉकचेन क्या है यह समझने के बाद आइए अब चर्चा करते हैं ब्लॉकचेन तकनीक कैसे काम करती है? किसी डेटा का ब्लॉक में दर्ज होना मुख्यतः दो चरणों में सम्पन्न होता है। इस प्रक्रिया में “माइनर्स” एवं “नोड्स” दो अहम किरदार अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं।

“नोड्स” ब्लॉकचेन नेटवर्क से जुड़े ऐसे लोग हैं, जिनके पास किसी विशेष ब्लॉकचेन नेटवर्क का रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है। उदाहरण के तौर पर किसी क्रीप्टोकरेंसी जैसे बिटकॉइन के लेन-देन से संबंधित ब्लॉकचेन नेटवर्क की बात करें तो इस नेटवर्क में नोड की भूमिका में कार्य करने वाले व्यक्ति के पास बिटकॉइन में हुए समस्त लेन-देन का शुरुआत से लेकर आखिरी ब्लॉक तक का रिकॉर्ड मौज़ूद होगा।

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वहीं “माइनर्स” नेटवर्क से जुड़े ऐसे लोग होते हैं, जो नोड द्वारा प्राप्त किसी डेटा को “डेटा के एक सुरक्षित ब्लॉक” के रूप में परिवर्तित करते हैं। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी की कार्यप्रणाली को एक उदाहरण की सहायता से समझा जा सकता है

माना कोई व्यक्ति A, व्यक्ति B को एक बिटकॉइन भेजना चाहता है। ऐसे में A अपने बिटकॉइन वॉलेट से B के वॉलेट में 1 बिटकॉइन भेजने का निवेदन करता है। यह निवेदन डेटा के एक पैकेट के रूप में ब्लॉकचेन नेटवर्क को भेजा जाता है।

अब नेटवर्क में उपस्थित प्रत्येक नोड इस सूचना को अपने पास उपलब्ध रिकॉर्ड से वेरीफाई करता है और सत्यापन के बाद इसे माइनर्स को भेजा जाता है। माइनर्स इस सूचना को एक सुरक्षित कुंजी (हैश) में परिवर्तित करते हैं, जिसके लिए उन्हें कुछ जटिल गणितीय प्रणाली को हल करना होता है।

Blockchain Technology in Hindi

अंत में माइनर्स सूचना का एक ब्लॉक बनाकर उसमें पूर्ववर्ती ब्लॉक की सुरक्षा कुंजी को संलग्न कर देते हैं। यह ब्लॉक पुनः नेटवर्क में मौजूद सभी नोड्स के पास जाता है तथा उनके द्वारा इस ब्लॉक को श्रंखला से जोड़ दिया जाता है। एक नए ब्लॉक बनने की यह प्रक्रिया औसतन 10 मिनट में सम्पन्न होती है।

ब्लॉकचेन तकनीक सुरक्षित क्यों है?

हम सभी की सामाजिक तथा आर्थिक पहचान सूचनाओं के आधार पर ही है। ये सभी सूचनाएं विभिन्न स्थानों पर स्टोर रहती हैं, जिनसे हमारी पहचान तथा अधिकार सुनिश्चित होते हैं। उदाहरण के तौर पर हमारे आर्थिक लेन-देन, किसी भी प्रकार की संपत्ति या परिसंपत्तियों का लेखा-जोखा, हमारी पहचान से संबंधित दस्तावेज इत्यादि।

इन सभी उदाहरणों में हम देखते हैं कि, सूचना को एकत्रित करने की एक केन्द्रीय व्यवस्था है और इस व्यवस्था में किसी सूचना को बदलना आसान है, लेकिन इसके विपरीत ब्लॉकचेन तकनीक की सहायता से सूचना के साथ छेड़-छाड़ करना या उसे बदलना लगभग नामुमकिन है।

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ब्लॉकचेन तकनीक में कोई सूचना ब्लॉक के रूप में होती है। प्रत्येक ब्लॉक में मुख्यतः तीन प्रकार का डेटा मौजूद होता है जिनमें ब्लॉक की मुख्य सूचना, पिछले ब्लॉक की सुरक्षा कुंजी तथा उस ब्लॉक की सुरक्षा कुंजी शामिल है। श्रंखला में किसी भी नए ब्लॉक के जुड़ने पर उस ब्लॉक में उसके पूर्व के ब्लॉक की सुरक्षा कुँजी संलग्न हो जाती है।

यदि किसी ब्लॉक की सूचना में बदलाव किया जाए तो उस ब्लॉक की सुरक्षा कुंजी भी परिवर्तित हो जाती है तथा उस ब्लॉक का श्रंखला के अगले ब्लॉक से संपर्क टूट जाता है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि किस ब्लॉक विशेष के साथ छेड़-छाड़ की गई है।

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इसके अतिरिक्त चूँकि ब्लॉकचेन (Blockchain Technology) का रिकॉर्ड नेटवर्क में उपस्थित हज़ारों विभिन्न नोड्स के पास भी मौजूद होता है अतः किसी एक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करके सूचना में अंतिम रूप से बदलाव करना संभव नहीं है। रिकॉर्ड रखने की यह विकेंद्रीकृत व्यवस्था इस तकनीक को बेहद सुरक्षित बनाती है। 

साधारण शब्दों में समझें तो ब्लॉकचेन तकनीक की पूरी व्यवस्था बहुमत के आधार पर कार्य करती है, जहाँ किसी सूचना का रिकॉर्ड एक व्यक्ति के पास न होकर उस नेटवर्क से जुड़े हजारों लोगों के पास उपलब्ध रहता है। इस प्रकार किसी एक रिकॉर्ड में सूचना को बदलने से उस सूचना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जब तक की नेटवर्क में उपस्थित आधे से अधिक लोग उस बदली हुई सूचना को स्वीकार न कर लें।

ब्लॉकचेन तकनीक के प्रकार

ब्लॉकचेन तकनीक के मुख्यतः दो प्रकार हैं, इन में पब्लिक ब्लॉकचेन तथा प्राइवेट ब्लॉकचेन शामिल हैं।

#1 पब्लिक ब्लॉकचेन

पब्लिक ब्लॉकचेन का प्रमुख उदाहरण क्रिप्टोकरेंसी का लेन-देन है। यह एक विकेन्द्रीकृत डेटाबेस है, जिसे कोई भी व्यक्ति देख सकता है इसके अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति आवश्यक संसाधनों की मदद से इस नेटवर्क में “नोड” की भूमिका में भी कार्य कर सकता है, जिसके चलते यह नेटवर्क अधिक सुरक्षित है। 

#2 प्राइवेट ब्लॉकचेन

प्राइवेट ब्लॉकचेन किसी कंपनी या संस्था विशेष का डेटाबेस होता है। इसकी पहुँच केवल अधिकृत लोगों तक ही होती है अतः यह एक केंद्रीय डेटाबेस के समान है, किंतु इसकी कार्यप्रणाली साधारण केंद्रीय डेटाबेस से भिन्न है। प्राइवेट ब्लॉकचेन में कुछ चुने हुए व्यक्ति “नोड” की भूमिका में कार्य करते हैं।

इसके साथ ही नेटवर्क के छोटा होने के कारण यहाँ सूचनाओं को ब्लॉक में बदलने का कार्य पब्लिक ब्लॉकचेन नेटवर्क की तुलना में कम समय में सम्पन्न हो जाता है। गौरतलब है कि, प्राइवेट ब्लॉकचेन तुलनात्मक रूप से पब्लिक ब्लॉकचेन से कम सुरक्षित है।

ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल कहाँ किया जा सकता है?

वर्तमान में ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी का अधिकतर उपयोग क्रिप्टोकरेंसी, जिसमें बिटकॉइन मुख्य है के लेन-देन में ही किया जा रहा है इसलिए अधिकांश लोग इस तकनीक को केवल क्रिप्टोकरेंसी या बिटकॉइन से जोड़कर देखते हैं। क्रिप्टो-करेंसी के लेन-देन के अलावा भी इस तकनीक को प्रयोग वृहत स्तर पर किया जा सकता है। आइए देखते हैं कुछ विशेष क्षेत्रों में इसके प्रयोग से कैसे आमूल-चूल परिवर्तन किए जा सकते हैं।

#1 मिलावटी दवाओं एवं वस्तुओं की पहचान

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाँ भर में सालाना तकरीबन 55 करोड़ लोग मिलावटी खाद्य सामग्री से बीमार पड़ते हैं, जबकि इससे मरने वालों की संख्या लगभग 2 लाख से अधिक है। वहीं एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार दुनियाँ में हर साल नकली दवाओं के सेवन से मरनें वालों की संख्या भी लाखों में है। इस तकनीक द्वारा किसी भी उत्पाद को उसके उत्पादन से बिक्री तक ट्रैक किया जा सकता है, जिससे उत्पादों के असली होने को सुनिश्चित किया जा सकता है।

#2 सरकारी योजनाओं में

ब्लॉकचेन तकनीक का एक अन्य उपयोग सरकारी योजनाओं में किया जा सकता है। इससे किसी सरकारी योजना के वित्तपोषण में भ्र्ष्टाचार को खत्म किया जा सकेगा। चूँकि किसी योजना विशेष के लिए धनराशि के आवंटन से खर्च होने तक का रिकॉर्ड सूचना के एक चेन के रूप में मौजूद होगा अतः सरकारी कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा भ्रष्टाचार में कमी आएगी। इसके अतिरिक्त कई सरकारी सूचनाओं का संग्रह भी इस माध्यम से किया जा सकता है।

#3 चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने में

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का महत्वपूर्ण उपयोग चुनाव प्रक्रिया को आसान एवं पारदर्शी बनाने में किया जा सकता है। किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। किंतु पिछले कुछ सालों से इलेक्ट्रॉनिक मशीनों द्वारा होने वाले चुनावों पर सवाल उठते रहे हैं।

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इसके अतिरिक्त भारत जैसे बड़े देश में बैलेट पेपर द्वारा चुनाव संपन्न कराना भी एक बड़ी चुनौती है इसके साथ ही इस प्रक्रिया में भी पोलिंग बूथ तथा बैलेट पेटी से छेड़छाड़ की संभावना बनी रहती है। इसके एक अन्य विकल्प के रूप में ब्लॉकचेन वोटिंग को देखा जा सकता है यह तकनीक बेहद सुरक्षित, पारदर्शी तथा वर्तमान चुनाव व्यवस्था की तुलना में बहुत कम खर्चीली है।

इस तकनीक द्वारा कोई भी व्यक्ति दुनियाँ के किसी भी हिस्से से चुनावी प्रक्रिया में भाग ले सकता है। मतदाता को अपनी पहचान सत्यापित कर मतदान करना होगा तथा वह मतदान एक सुरक्षित ब्लॉक के रूप में श्रंखलित हो जाएगा, जिससे भविष्य में छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं होगी।

#4 कानून का पारदर्शी प्रवर्तन

ब्लॉकचेन तकनीक कानून के बेहतर प्रवर्तन में भी कारगर साबित हो सकती है। इसकी सहायता से किसी व्यक्ति विशेष की आपराधिक गतिविधियों को रिकॉर्ड से हटाना तथा पुराने रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करना असंभव होगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पारदर्शी होगी।

#5 कृषि एवं रियल एस्टेट

इस तकनीक की सहायता से इन क्षेत्रों में भूमि संबंधित सुधार किए जा सकते हैं। कई किसानों के पास जमीन के आवश्यक दस्तावेज न होने के चलते उन्हें ऋण उपलब्ध नहीं हो पाता, जबकि अवैध तरीके से किसानों की जमीन हड़पने के मामले भी समाचारों में अक्सर दिखाई देते हैं। इस तकनीक की मदद से जमीन का रिकॉर्ड रखना बेहद आसान और सुरक्षित होगा।

ब्लॉकचेन तकनीक के फायदे एवं नुकसान

ब्लॉकचेन तकनीक की सहायता से सूचनाओं के साथ छेड़-छाड़ करना या नकली दस्तावेज बना पाना असंभव होगा, किसी मध्यस्थ संस्था की भूमिका खत्म हो जाएगी अतः ऐसी संस्थाओं द्वारा अपने ग्राहकों पर लगाए जाने वाले अनावश्यक प्रतिबंध जैसे प्रतिदिन मुद्रा हस्तांतरण की सीमा आदि भी अस्तित्व में नहीं रहेंगे। वैश्विक स्तर पर मुद्रा का लेन-देन त्वरित, आसान व कम खर्चीला होगा।

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वहीं नुकसान की बात करें तो हर तरह की प्रौद्योगिकी में कुछ न कुछ खामियाँ अवश्य होती हैं। सबसे पहली खामी की बात की जाए तो इस तकनीक में अत्यधिक संसाधनों तथा विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता होती है। इसके अलावा जैसा कि, हमनें देखा इस तकनीक में कोई भी लेन-देन या किसी सूचना का अंतिम रूप से ब्लॉक में दर्ज होना इस नेटवर्क से जुड़े बहुसंख्यक नोड्स पर निर्भर करता है।

हालाँकि यह प्रायोगिक नहीं है फिर भी यदि बहुसंख्यक नोड्स किसी सूचना के साथ छेड़-छाड़ करना चाहें तो यह तकनीक सुरक्षित नहीं रह जाती, इस प्रक्रिया को 51% अटैक कहा जाता है। फायदे एवं नुकसान दोनों की तुलना करी जाए तो अधिकांशतः इस तकनीक के फायदे ही हैं। भविष्य में अर्थव्यवस्था तथा अन्य क्षेत्रों में इस तकनीक का प्रयोग क्रांतिकारी साबित होगा।

सार-संक्षेप

ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी एक प्रकार का डिजिटल डेटाबेस है, जहाँ किसी भी प्रकार के डेटा को अलग-अलग ब्लॉक में स्टोर किया जा सकता है और ये सभी ब्लॉक एक चेन के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। इस तकनीक की खास बात यह है कि, यहाँ डेटा विकेंद्रीकृत रूप में स्टोर किया जाता है जिस कारण इससे छेड़-छाड़ करना संभव नहीं होता और यहाँ स्टोर किया गया डेटा बेहद सुरक्षित रहता है।

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