Thursday, April 3, 2025

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश या FDI क्या है? प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के फायदे और नुकसान

एक देश की किसी कंपनी, व्यक्ति, संस्थान या सरकार द्वारा दूसरे देश में स्थित व्यवसायों में किया गया निवेश, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कहलाता है। ये निवेश सामान्यतः दीर्घकालिक अवधि के होते हैं, जिनका लक्ष्य विदेशी बिजनेस में नियंत्रण या स्वामित्व प्राप्त करना होता है।

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किसी भी देश में विकास कार्यों को संचालित करने के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है और जब कोई देश विकासात्मक कार्यों के लिए घरेलू स्रोतों से पर्याप्त साधन नहीं जुटा पाता है, तब उस देश द्वारा विदेशी निवेश को आकर्षित करने के प्रयास किये जाते हैं।

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हाँलाकि विदेशी निवेशकों का मुख्य उद्देश्य घरेलू संसाधनों के अधिकतम दोहन द्वारा लाभ अर्जित करना होता है, लेकिन संसाधनों का अधिकतम दोहन देश के विकास के लिए भी आवश्यक है। इसलिए विदेशी निवेश के आने से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्र विकसित होने लगते हैं और देश विकास के पथ पर आगे बढ़ता है।

किसी देश में ये निवेश कई तरीकों से आ सकता है, जिन्हें हम आगे जानेंगे और इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण तरीके प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की लेख में विस्तार से चर्चा करेंगे। जैसे एफडीआई क्या है, इसके कितने प्रकार हैं, एफडीआई का किसी देश पर क्या प्रभाव पड़ता है और देश के किन क्षेत्रों में कितना निवेश किया जा सकता है।

विदेशी निवेश के प्रकार

विदेशी निवेश के प्रकारों से आशय है कि किन-किन तरीकों से देश में विदेशी निवेश किया जा सकता है। विदेशी निवेश मुख्यतः दो प्रकार से किया जाता है।

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  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment) किसी एक देश की कंपनी, व्यक्ति, संस्थान या सरकार द्वारा दूसरे देश के किसी व्यवसाय अथवा उद्योग में किया गया निवेश है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश शब्द का इस्तेमाल किसी विदेशी व्यवसाय में किये गए मामूली निवेश जैसे किसी विदेशी कंपनी के स्टॉक में निवेश आदि को दर्शाने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि इसका इस्तेमाल किसी विदेशी बिजनेस में अच्छी-खासी हिस्सेदारी हासिल करने या उसे पूर्ण रूप से खरीद लेने की स्थित में किया जाता है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के माध्यम से किसी देश में विदेशी मुद्रा के अतिरिक्त नए स्किल तथा टेक्नोलॉजी का भी आगमन होता है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य किसी देश में सेवाओं तथा वस्तुओं का उत्पादन कर उनसे लाभ अर्जित करना होता है, जो एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है इसलिए FDI एक स्थायी प्रवृत्ति का निवेश है।

कोई निवेशक, कंपनियाँ अथवा सरकारें एफडीआई के लिए सामान्यतः खुली अर्थव्यवस्थाओं की फर्मों, परियोजनाओं को प्राथमिकता देती हैं।

इसके साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर आसान कानूनी प्रक्रिया वाले देशों को भी निवेशक अधिक महत्व देते हैं। चूँकि FDI एक दीर्घकालिक निवेश होता है अतः यहाँ पूंजी के साथ-साथ कुशल प्रबंधन, प्रौद्योगिकी और उपकरणों का निवेश भी किया जाता है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई), विदेशी निवेश का एक अहम हिस्सा है। यह निवेशकों, संस्थानों या विभिन्न म्यूचुअल फंड द्वारा किसी अन्य देश में स्टॉक, बॉन्ड, डिबेंचर्स अथवा अन्य किसी वित्तीय उपकरण में किये गए निवेश को संदर्भित करता है।

FPI किसी निवेशक के पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन की एक रणनीति होती है, ताकि देश के घरेलू मामलों के चलते आने वाले उतार-चढ़ाव से पोर्टफोलियो का एक हिस्सा सुरक्षित रहे।

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जहाँ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का उद्देश्य दूसरे देश के किसी व्यवसाय / उद्योग आदि के प्रबंधन पर नियंत्रण प्राप्त करना होता है, वहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का मुख्य उद्देश्य अल्पकालिक समय में लाभ कामना होता है। यहाँ निवेशक निवेशित व्यवसाय के दिन-प्रतिदिन के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेता।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश मुख्यतः शेयर बाज़ार में किया जाता है, गौरतलब है की किसी कंपनी में 10% से अधिक विदेशी निवेश को एफडीआई की श्रेणी में रखा जाता है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश या एफडीआई के प्रकार

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मुख्यतः निम्नलिखित 4 प्रकार का होता है-

  • Horizontal FDI
  • Vertical FDI
  • Conglomerate FDI
  • Platform FDI

Horizontal FDI

हॉरिजॉन्टल एफडीआई एक ऐसा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है, जिसमें कोई कंपनी अपने मूल व्यवसाय का ही विस्तार किसी दूसरे देश में करती है और उत्पादन की उन्हीं गतिविधियों को दोहराती है जैसा वह अपने देश में कर रही थी।

क्षैतिज एफडीआई अक्सर नए बाजारों में प्रवेश करने, उत्पादन लागत को कम करने जैसे उद्देश्यों से प्रेरित होता है। इसके उदाहरण की बात करें तो McDonald's कंपनी द्वारा भारतीय बाजार में प्रवेश इसका एक उदाहरण है।

Vertical FDI

वर्टिकल एफडीआई में कोई कंपनी अपने व्यवसाय को बदले बिना किसी अन्य देश में अपने मूल बिजनेस के ही किसी पूरक बिजनेस (Complimentary Business) में निवेश करती है।

इस निवेश का उद्देश्य अपनी आपूर्ति श्रंखला को मजबूत करना होता है। उदाहरण के लिए यदि McDonald's किसी अन्य देश में अपने मूल बिजनेस की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किसी मांस प्रसंस्करण से जुड़ी कंपनी का अधिग्रहण कर ले, तो इसे वर्टिकल विदेशी निवेश कहा जाएगा।

Conglomerate FDI

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के इस प्रकार में कोई कंपनी दूसरे देश में किसी ऐसे बिजनेस में निवेश करती है, जो उसके मूल बिजनेस से पूर्णतः अलग होता है।

अधिकांशतः कांग्लोमरेट विदेशी निवेश करने वाली कंपनी को विदेशी कंपनी के व्यवसाय का कोई पूर्व अनुभव नहीं होता है, इसलिए यह निवेश अक्सर एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) का रूप ले लेता है।

Platform FDI

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का अंतिम प्रकार प्लेटफ़ॉर्म एफडीआई है। इस प्रकार के निवेश में कोई कंपनी किसी दूसरे देश में अपने मूल बिजनेस का विस्तार करती है, किन्तु हॉरिजॉन्टल एफडीआई के विपरीत यहाँ उत्पादित होने वाले उत्पादों को दुनियाँ के अन्य देशों में निर्यात कर दिया जाता है।

उदाहरण के लिए दुनियाँ के प्रसिद्ध फैशन ब्रांडस द्वारा बेची जाने वाली अधिकांश लग्जरी वस्तुएं जैसे कपड़े इत्यादि बांग्लादेश, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों में निर्मित होते हैं।

इसके अलावा दुनियाँ की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Apple के 90 फीसदी से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद चीन में निर्मित किये जाते हैं। ये दोनों ही प्लेटफ़ॉर्म एफडीआई के मुख्य उदाहरण हैं।

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मुख्यतः दो मार्गों से किया जा सकता है। इनमें पहला है ऑटोमैटिक रूट, जहाँ किसी गैर-निवासी निवेशक या भारतीय कंपनी को निवेश करने के लिए सरकार से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होती है। भारत में अधिकांश निवेश इसी मार्ग से आता है।

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निवेश का दूसरा विकल्प है मंजूरी मार्ग (Approval Route) इसमें निवेश करने से पूर्व भारत सरकार की मंजूरी लेना आवश्यक होता है। घरेलू उद्योगों में विदेशी निवेशकों का प्रभुत्व न हो इसलिए सरकार द्वारा कुछ विशेष महत्व वाले क्षेत्रों में एफडीआई के लिए सीमाएं तय करी गई हैं।

हालांकि कई क्षेत्रों में निवेशक बिना सरकार की मंजूरी के 100% तक भी निवेश कर सकते हैं। ऐसे कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र तथा इनमें हो सकने वाले अधिकतम विदेशी निवेश के बारे में नीचे बताया गया है।

क्षेत्र निवेश की सीमानिवेश के मार्ग
Banking- Public20%Government
Banking- Private74%49%- Automatic. Above 49-74%- Government
Insurance74%Automatic
Asset Reconstruction Companies100%Automatic
Credit Information Companies100%Automatic
White Label ATMs100%Automatic
Pension sector49%Automatic
Agriculture & Animal Husbandry100%Automatic
Plantation sector100%Automatic
Mining100%Automatic
Petroleum & Natural gas refining100%Automatic
Defence manufacturing100%Automatic upto 49%. Above 49% under Government route.
Broadcasting teleports100%Automatic
Broadcasting content services49%Government
Print media, dealing with news26%Government
Publishing/printing of scientific and technical magazines/specialty journals100%Government
Civil aviation- Airports100%Automatic
Civil aviation- Air transport services100%Automatic up to 49% Above 49% under Government route.
Digital Media26%Government
Telecom100%49%- Automatic. Above 49%- Government
Railways100%Automatic
Financial services’ activities regulated by RBI, SEBI, IRDAI, other regulator100%Automatic
Pharmaceuticals (Greenfield)100%Automatic
Pharmaceuticals (Brownfield)100%Automatic upto 74%, above 74% under Government
Power exchanges49%Automatic
Construction development100%Automatic
Industrial parks100%Automatic
Satellites100%Government
E-commerce activities100%Automatic
Private security agencies74%Automatic up to 49%. Above 49%- 74% under Government
Single brand retail trading100%Automatic up to 49%. Above 49% under Government
Multi-brand retail trading51%Government
Duty-free shops100%Automatic
Food products manufactured or produced in India100%Government
Cash & carry wholesale trading100%Automatic
Biotechnology100%Automatic
Electricals machinery and system100%Automatic
Food processing100%Automatic
Ports and shipping100%Automatic
Textiles and garments100%Automatic
Tourism and hospitality100%Automatic
Source; Investindia

FDI के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र

देश की संप्रभुता को देखते हुए सरकार द्वारा कुछ विशेष क्षेत्रों में विदेशी निवेश यानी एफडीआई पर पूर्णतः रोक लगाई गई है। ऐसे क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • सरकारी या गैर-सरकारी लौटरी
  • सट्टेबाजी या कसीनो
  • चिट फंड एवं निधि कंपनियों में निवेश
  • Transferable Development Rights (TDR) में ट्रेडिंग
  • रियल एस्टेट व्यवसाय
  • नाभिकीय ऊर्जा
  • तंबाकू उत्पाद जैसे सिगरेट, सिगार आदि

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का देश पर प्रभाव

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किसी भी देश में विकास कार्यों को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यह निवेश करने वाले तथा निवेश किये गए दोनों देशों के लिए फायदेमंद होता है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जहाँ विकासशील देशों में नए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का निर्माण और स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों के सृजन होता है वहीं इससे निवेश करने वाली कंपनियों को भी अपने व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर ले जाने का मौका मिलता है।

इसके अलावा किसी अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के निम्नलिखित अच्छे और बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं-

FDI के किसी देश पर सकारात्मक प्रभाव

  • संसाधनों का दोहन

वर्तमान स्थिति की बात करें तो भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था है तथा देश में उपलब्ध संसाधनों का पूर्ण रूप से दोहन करने के लिए देश में आवश्यक टेक्नोलॉजी का अभाव है। ऐसे में संसाधनों का पूर्ण रूप से इस्तेमाल किया जा सके इसके लिए एफ़डीआई की आवश्यकता है।

  • आधारभूत संरचना का निर्माण

देश के विभिन्न क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन इत्यादि में आधारभूत संरचना या इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति खराब है, जिस कारण देश की आर्थिक विकास दर बेहद धीमी है। लिहाजा देश में आधारभूत संरचना को मजबूत करने में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • द्वितीयक क्षेत्र का विकास

अर्थव्यवस्था में द्वितीयक या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (कच्चे माल से निर्मित उत्पाद) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका योगदान बहुत कम है। अतः इस क्षेत्र में विदेशी निवेश (FDI) द्वारा देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।

  • रोजगार का सृजन

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का एक महत्वपूर्ण फायदा तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) है, ताकि देश किसी तकनीकी विशेष में आत्मनिर्भर बन सके। इसके अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ने के चलते रोजगार के अवसरों का भी सृजन होता है, जिसकी देश को अधिक आवश्यकता है।

FDI के किसी देश पर नकारात्मक प्रभाव

किसी क्षेत्र विशेष में अधिक मात्रा में विदेशी निवेश के कारण घरेलू कंपनियों तथा उद्योगों को इसका नुकसान होता है। इसके अतिरिक्त अत्यधिक मात्रा में विदेशी निवेश किसी देश की संप्रभुता के लिए भी हानिकारक है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सर्वाधिक लाभ किस क्षेत्र को मिला है?

इन्वेस्ट इंडिया पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान भारत में तकरीबन $70.97 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया, जिसमें उच्चतम एफडीआई इक्विटी प्राप्त करने वाले शीर्ष 5 क्षेत्र निम्नलिखित हैं-

  • सेवा क्षेत्र (वित्त, बैंकिंग, बीमा, गैर-वित्तीय/व्यवसाय, आउटसोर्सिंग, अनुसंधान एवं विकास, कूरियर, तकनीकी परीक्षण और विश्लेषण, अन्य) - 16%
  • कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर - 15%
  • ट्रेडिंग - 6%
  • दूरसंचार - 6%
  • ऑटोमोबाइल उद्योग - 5%

इसके अलावा सबसे अधिक निवेश प्राप्त करने वाले राज्यों की बात करें, तो इनमें महाराष्ट्र (29%), कर्नाटक (24%), गुजरात (17%), दिल्ली (13%) और तमिलनाडु (5%) शामिल हैं।

सार-संक्षेप

एफडीआई कंपनियों या सरकारों द्वारा विदेशी फर्मों, परियोजनाओं आदि में प्रत्यक्ष रूप से किया गया निवेश है, जिसका उद्देश्य विदेशी बिजनेस के प्रबंधन में नियंत्रण प्राप्त करना होता है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दुनिया भर में नकदी प्रवाह (Cash Flow) में लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देता है। साल 2022 में सबसे अधिक एफडीआई प्राप्त करने वाले शीर्ष 5 देशों में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, चीन, नीदरलैंड और आयरलैंड शामिल हैं।

विदेशी निवेश के किसी भी देश पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रभाव हैं। इसके बावजूद विदेशी निवेश देश के विकास के लिए आवश्यक है, अतः सरकारों को चाहिए कि ऐसी नीतियों का निर्माण किया जाए जिनसे घरेलू उद्योगों का संरक्षण भी किया जा सके तथा विदेशी निवेश का शत प्रतिशत लाभ भी देश को मिले।

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