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बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) क्या हैं?

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बौद्धिक संपदा किसे कहते हैं?

हम सभी के पास जीवन में छोटे-बड़े कई तरह के एसेट्स होते हैं, जिनके हम कानूनी रूप से मालिक होते हैं जैसे वाहन, मकान, जमीन, मशीनरी इत्यादि। यहाँ गौर करने वाली बात है कि ये सभी एसेट्स भौतिक प्रकृति के हैं, जिन्हें शारीरिक श्रम से तैयार किया गया है।

एसेट्स की एक अन्य श्रेणी भी होती है, जिन्हें हम देख अथवा महसूस नहीं कर सकते और इन्हें इंटेंजिबल एसेट्स कहा जाता है। ये अधिकांशतः ऐसी संपत्तियाँ होती हैं, जिन्हें मानसिक श्रम से तैयार किया जाता है जैसे कविताएं, पेंटिंग, संगीत, प्रतीक चिन्ह, फोटोग्राफ इत्यादि।

किसी व्यक्ति या संगठन के मानसिक श्रम से उत्पन्न करे गए आविष्कारों, कृतियों, डिज़ाइनों एवं प्रतीकों को बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) कहा जाता है। ये एसेट्स समाज के लिए तो उपयोगी होते ही हैं साथ ही सृजनकर्ता (Creator) के लिए भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।

बौद्धिक संपदा अधिकार क्या हैं?

किसी भी सृजनकर्ता को अपनी बौद्धिक सम्पदा के नियंत्रण एवं इसकी सुरक्षा के लिए दिए जाने वाले अधिकार बौद्धिक संपदा अधिकार या Intellectual Property Rights (IPR) कहलाते हैं। ये अधिकार किसी देश के भीतर एक कानूनी प्रक्रिया द्वारा निश्चित समयावधि एवं शर्तों के साथ प्रदान किये जाते हैं।

बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रकार

बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) मुख्यतः 6 प्रकार के होते हैं।

  • कॉपी राइट (Copyright)
  • ट्रेड मार्क (Trademarks)
  • ट्रेड सीक्रेट (Trade Secret)
  • इंडस्ट्रियल डिज़ाइन (Industrial Design)
  • पेटेंट (Patents)
  • भौगोलिक संकेतक (Geographical Indicator)

#1 कॉपीराइट (Copyright)

किसी सृजनकर्ता द्वारा साहित्य, कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में सृजित कृतियों के लिए कॉपीराइट (Copyright) अधिकार दिया जाता है, उदाहरण के लिए कोई किताब, फ़िल्म, संगीत, फोटोग्राफ, पेंटिंग इत्यादि। विभिन्न देशों में इस अधिकार के संबंध में अलग-अलग प्रावधान हो सकते हैं।

भारत की बात करें तो यहाँ इस अधिकार की अवधि सृजनकर्ता के सम्पूर्ण जीवनकाल तथा उसकी मृत्यु के बाद 60 वर्षों तक होती है। इस अवधि के दौरान सृजनकर्ता की अनुमति के बिना उसकी कृति का उपयोग नहीं किया जा सकता, हालांकि मूल निर्माता किसी भी व्यक्ति को अपनी कृति (Creation) का उपयोग करने के लिए लाइसेंसिंग समझौते के माध्यम से अधिकार दे सकते हैं।

गौरतलब है कि, मूल निर्माता की मृत्यु के 60 वर्षों के बाद उसके कार्य के अधिकार सार्वजनिक हो जाते हैं दूसरे शब्दों में ऐसी संपत्ति सार्वजनिक हो जाती है।

#2 ट्रेड मार्क (Trade Marks)

किसी सेवा (Service), संस्था अथवा उत्पाद का नाम तथा नाम के साथ जुड़ी कला, जैसे लोगो, प्रतीक चिन्ह या कोई वाक्यांश आदि ट्रेडमार्क (Trademark) कहलाते हैं और ट्रेडमार्क अधिकार द्वारा संरक्षित होते हैं। ये कृतियाँ पहचानने योग्य होती हैं और सामान्यतः किसी उत्पाद का प्रतिनिधित्व करती हैं ताकि बाजार में ऐसे उत्पादों की एक विशिष्ट पहचान बनी रहे।

ट्रेडमार्क के उदाहरणों की बात करें तो Coca-Cola कंपनी का नाम एवं उसकी लिखावट, स्पोर्ट्स ब्रैंड Nike द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला वाक्यांश “Just Do It” तथा किसी भी संस्थान का लोगो इत्यादि ट्रेडमार्क अधिकार के तहत संरक्षित होते हैं और किसी अन्य व्यक्ति या कंपनी द्वारा इनका प्रयोग नहीं किया जा सकता।

#3 ट्रेड सीक्रेट (Trade Secret)

जब एक उत्पाद को बनाने में किसी पदार्थ के मिश्रण या किसी विशेष प्रक्रिया को अपनाने से उस उत्पाद में कुछ विशिष्ट गुण उत्पन्न हो जाते हैं और उस गुण से उत्पाद का महत्व बढ़ जाता है, तो यह विशेष पदार्थ एवं उत्पादन की प्रक्रिया ट्रेड सीक्रेट (Trade Secrets) कहलाती है।

ट्रेड सीक्रेट किसी कंपनी द्वारा अपने उत्पादों के उत्पादन में अपनाई जाने वाली कोई विशिष्ट प्रक्रिया है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती है और यह कंपनी या ट्रेड सीक्रेट धारक को आर्थिक लाभ प्रदान करती है। ट्रेड सीक्रेट सामान्यतः किसी कंपनी के अनुसंधान और विकास (Research & Development) का परिणाम होते हैं, जिन्हें धारक द्वारा संरक्षित किया जाता है।

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उत्पादन प्रक्रिया की इस गोपनीयता ट्रेड सीक्रेट अधिकार के तहत सुरक्षित किया जाता है। इसके उदाहरणों की बात करें तो KFC के फ्राइड चिकन के लिए उपयोग किए जाने वाले 11 जड़ी-बूटियों और मसालों का मिश्रण, Coca-Cola का फॉर्मूला, PEPSI का विशिष्ट स्वाद बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले फ्लेवर फॉर्मूला इत्यादि इसके उदाहरण हैं।

#4 इंडस्ट्रियल डिज़ाइन (Industrial Design)

इंडस्ट्रियल डिज़ाइन अधिकार द्वारा किसी वस्तु के दृश्य स्वरूप (Visual Appearance) जैसे कि उसके आकार, रंग, पैटर्न और डिजाइन को सुरक्षित रखा जाता है। इन अधिकारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजाइन के मूल निर्माता को उसके डिज़ाइन का विशेष रूप से उपयोग करने और दूसरों द्वारा उपयोग करने से रोकने के अनन्य अधिकार (Exclusive Rights) प्राप्त हो।

इंडस्ट्रियल डिज़ाइन (Industrial Design) के उदाहरणों में दिग्गज स्मार्टफोन निर्माता Apple Inc. (AAPL) के स्मार्टफोन iPhone का होम बटन इसी अधिकार द्वारा संरक्षित है अतः कोई अन्य स्मार्टफोन कंपनी इस डिज़ाइन का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

#5 पेटेंट (Patent)

पेटेंट (Patent) औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आविष्कारों (Inventions) पर दिया जाने वाला अधिकार है, इन आविष्कारों में मुख्य रूप से कोई उपकरण, डिजाइन, रासायनिक फार्मूला, जैविक रूपांतरण, सॉफ्टवेयर एवं कंप्यूटर प्रोग्राम आदि शामिल हैं।

पेटेंट किसी देश में निश्चित समय सीमा एवं शर्तों के साथ दिया जाता है और कोई भी व्यक्ति पेटेंट की अवधि तक मूल निर्माता की अनुमति के बिना उसके अविष्कार का उपयोग नहीं कर सकता। निर्माता चाहे तो अपने पेटेंट का पूर्ण एवं आंशिक भाग बेच भी सकता है।

भारत में विभिन्न क्षेत्रों में पेटेंट की अवधि सामान्यतः 20 वर्ष है, इसके पश्चात सभी अविष्कार सार्वजनिक हो जाते हैं, देश में पेटेंट से जुड़े सभी मामले The Patents Act, 1970 के तहत विनियमित होते हैं।

#6 भौगोलिक संकेतक (GI)

भौगोलिक संकेतक (Geographical Indicator) जैसा कि, इसके नाम से साफ होता है एक प्रकार का संकेतक है, जिसका उपयोग एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र के प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित उत्पादों को विशिष्ट पहचान प्रदान करने के लिये किया जाता है।

इन उत्पादों का महत्व उस स्थान विशेष या किसी परंपरागत प्रक्रिया के कारण होता है तथा एसे उत्पादों को भौगोलिक संकेतक टैग (GI Tag) प्रदान कर संरक्षित किया जाता है। GI टैग के कारण किसी उत्पाद का आर्थिक महत्व बढ़ जाता है। भारत में यह व्यवस्था भारतीय भौगोलिक संकेतक एवं वस्तु अधिनियम 1999 द्वारा संचालित होती है।

भारत में पहला GI टैग दार्जिलिंग चाय को 2004 में दिया गया था, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर विशिष्ट प्राकृतिक तथा मानव निर्मित उत्पादों को GI टैग दिया जाता है। वर्तमान में देश के 635 से अधिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक का दर्ज़ा मिल चुका है। इनमें मणिपुर के काले चावल, कश्मीरी केसर, कोविलपट्टी (तमिलनाडु) की कडलई मिठाई आदि शामिल हैं।

बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का इतिहास

वैश्विक स्तर परबौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) के संबंध में सर्वप्रथम पेरिस में 1883 में एक सम्मेलन आयोजित किया गया। यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता था, जिसके माध्यम से कोई आविष्कारक अपने नवाचारों की रक्षा कर सकता था, भले ही उसका उपयोग अन्य देशों में किया जा रहा हो।

इसके पश्चात 1886 में स्विट्जरलैंड के बर्न में हुए एक समझौते के तहत साहित्यिक और कलात्मक कार्यों के संरक्षण पर भी बल दिया गया। साल 1891 में स्पेन के मैड्रिड में हुए एक अन्य सम्मेलन के द्वारा ट्रेडमार्क के पंजीकरण और प्रबंधन की व्यवस्था की गई।

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1893 में, बौद्धिक संपदा संरक्षण के लिए यूनाइटेड इंटरनेशनल ब्यूरो का गठन किया गया। यह संगठन पेरिस और बर्न दोनों समझौतों को संचालित करने के लिए एक सामान्य मंच था। संगठन को इसके फ्रेंच संक्षिप्त नाम BIPRI के रूप में जाना जाता था।

1970 में BIPRI विश्व बौद्धिक संपदा संगठन में बदल गया, जिसे WIPO कहा जाता है। 1974 में WIPO बौद्धिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने और आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा के लिए एक विशेष एजेंसी के रूप में संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा बन गया। वर्तमान में दुनियाँ भर में WIPO के 193 सदस्य देश हैं।

सारांश

बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) इस प्रकार की संपत्तियाँ हैं, जो किसी व्यक्ति या संगठन के मानसिक श्रम से निर्मित होती हैं, ये सृजनकर्ता के लिए आर्थिक महत्व की होती हैं साथ ही समाज के लिए भी किसी न किसी रूप में उपयोगी होती हैं।

बौद्धिक संपत्तियों के संबंध में प्रदान किये जाने वाले कानूनी अधिकार जो निर्माताओं या कलाकारों को उनके द्वारा बनाई गई कृतियों के उपयोग, वितरण और संरक्षण पर नियंत्रण प्रदान करते हैं, उन्हें बौद्धिक संपदा अधिकार या Intellectual Property Rights (IPR) कहा जाता है।