Thursday, April 3, 2025

पर्चेजिंग पावर पैरिटी या क्रय शक्ति समता (PPP) क्या है?

क्रय शक्ति समता या पर्चेजिंग पावर पैरिटी एक लोकप्रिय आर्थिक विश्लेषण मैट्रिक है जिसका उपयोग दुनियाँ के अलग-अलग देशों के बीच आर्थिक उत्पादकता और जीवन स्तर की तुलना करने के लिए किया जाता है।

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क्रय शक्ति समता (PPP) क्या है?

यदि भारतीय रुपये की विदेशी मुद्रा उदाहरण के तौर पर अमेरिकी डॉलर के साथ तुलना करी जाए तो एक डॉलर की कीमत वर्तमान में 83.26 भारतीय रुपये के करीब है। तब क्या यह समझ लिया जाए कि, अमेरिका में यदि कोई वस्तु 1 डॉलर में मिलती है तो भारत में उसकी कीमत 83.26 रुपये होगी?

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अगर आपका जवाब हाँ है तो आप गलत हैं। विदेशी मुद्रा का एक्सचेंज रेट बाज़ार के बहुत से कारकों पर निर्भर करता है। लेकिन यदि किन्हीं दो देशों के मध्य रहन-सहन का खर्च अर्थात वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों की गणना करनी हो तब एसी स्थिति में क्रय शक्ति (Purchasing Power) का इस्तेमाल किया जाता है।

यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि, ये व्यवस्था केवल ऐसे उत्पादों पर लागू होती है, जिनका उत्पादन दोनों देशों में होता हो दूसरे शब्दों में आयात किए गए उत्पादों पर यह सिद्धांत लागू नहीं होता है।

आइए अब विस्तार से समझते हैं क्रय शक्ति किसे कहते हैं? क्रय शक्ति का अर्थ है कि, किसी मुद्रा की एक निश्चित राशि (जैसे 100 भारतीय रुपये) से कितनी मात्रा में सेवाएं या वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं।

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इसे एक उदाहरण की सहायता से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए अमेरिका में एक पानी की बोतल के लिए 1$ का भुगतान करना पड़ता है। यदि USD/INR एक्सचेंज रेट के आधार पर देखें तो भारत में इसकी कीमत 83.26 रुपये होनी चाहिए, किन्तु भारत में वही पानी की बोतल 20 रुपये में मिल जाती है।

इस प्रकार 1 डॉलर की क्रय शक्ति 20 रुपये के बराबर हुई अर्थात 1 डॉलर तथा 20 रुपये से समान वस्तुएं अथवा सेवाएं खरीदी जा सकती हैं। क्रय शक्ति समता के आधार पर दो देशों के मुद्राओं की क्रय शक्ति की तुलना कर उनके मध्य रहन-सहन के खर्च या Living Cost की तुलना करी जाती है।

साथ ही आप इसकी मदद से दो देशों में किसी कार्य को करने पर मिलने वाली सैलरी की तुलना भी कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि भारत में कोई व्यक्ति साल के 30 लाख रुपये कमाता है जबकि अमेरिका में इसी कार्य के लिए उसे 1 लाख डॉलर का वेतन ऑफर किया जाता है तो अमेरिका के बजाए भारत में उसका जीवन उच्च स्तर का होगा।

दूसरे शब्दों में वह व्यक्ति भारत में 30 लाख रुपयों से अमेरिका के 1 लाख डॉलर के बजाए अधिक वस्तुएं और सेवाएं खरीद सकेगा, ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका के 1 लाख डॉलर की क्रय शक्ति उतनी ही होगी जितनी भारत में 24 लाख रुपयों की है।

क्रय शक्ति समता की गणना कैसे करी जाती है?

क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity) की गणना करने के लिए सबसे पहले एक देश (C1) में उपभोग करी जाने वाले “वस्तुओं और सेवाओं” जैसे भोजन, कपड़े, आवास इत्यादि की एक बास्केट तैयार करी जाती है। इसमें विशेष रूप से ऐसी सेवाओं और वस्तुओं को शामिल किया जाता है जिनका इस्तेमाल देश की औसत आबादी करती हो, इसके बाद देश की घरेलू मुद्रा में इस पूरी बास्केट की कीमत निकाली जाती है।

अब बास्केट में मौजूद समान वस्तुओं और सेवाओं की कीमत दूसरे देश (C2) के संबंध में ज्ञात करी जाती है। इसके पश्चात बास्केट की कीमतों की तुलना P1 = P2 करने पर क्रय शक्ति की गणना करी जा सकती है और क्रय शक्ति के आधार पर करेंसी के असल एक्सचेंज रेट को ज्ञात किया जा सकता है।

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C1 की करेंसी का C2 की करेंसी के साथ एक्सचेंज रेट ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का इस्तेमाल किया जा सकता है। जहाँ P1 पहले देश की मुद्रा में बास्केट की कीमत तथा P2 दूसरे देश की मुद्रा में बास्केट की कीमत को दर्शाता है।

\[ \text{ Exchange Rate} = \frac{\text{Price Level in Country A (P1)}}{\text{Price Level in Country B (P2)}} \]

विश्व बैंक द्वारा Purchasing Power Parity (PPP) सूचकांक जारी किया जाता है, जिसमें दैनिक जीवन में इस्तेमाल किये जाने वाले प्रमुख उत्पादों तथा सेवाओं की बास्केट की कीमत ज्ञात कर प्रत्येक देश के मुद्रा की क्रय शक्ति डॉलर की तुलना में प्रदर्शित की जाती है। विश्व बैंक द्वारा जारी वर्ष 2022 की रिपोर्ट के अनुसार 1 अमेरिकी डॉलर की क्रय शक्ति 24.059 रुपये के बराबर है।

Purchasing Power Parity के आधार पर GDP की गणना

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश के भीतर किसी वर्ष के दौरान उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को संदर्भित करता है। विभिन्न देशों की GDP की गणना सर्वप्रथम उनकी घरेलू मुद्रा में की जाती हैं तत्पश्चात उसे बाज़ार विनिमय दर के अनुसार डॉलर में परिवर्तित कर प्रदर्शित किया जाता है, इसे नॉमिनल जीडीपी कहा जाता है।

क्रय शक्ति के अनुसार देखें तो 1 डॉलर 24.059 रुपयों के बराबर है अतः भारत की जीडीपी को डॉलर में प्रदर्शित करनें के लिए यदि Purchasing Power Parity की विनिमय दर को ध्यान में रखा जाए तो भारत की जीडीपी पूर्व की तुलना में तीन गुने से भी अधिक होगी। यही कारण है कि भारत की नॉमिनल जीडीपी $3.732 ट्रिलियन है, जबकि क्रय शक्ति समता के अनुसार जीडीपी $13.12 ट्रिलियन है।

क्रय शक्ति समता की सीमाएं

क्रय शक्ति समता (PPP) किन्हीं दो देशों के बीच जीवन स्तर की तुलना करने का एक महत्वपूर्ण टूल है किन्तु इसकी अपनी सीमाएं भी हैं, आइए PPP सिद्धांत की कुछ ऐसी ही अहम सीमाओं की चर्चा करते हैं-

#1 उत्पादों की गुणवत्ता: क्रय शक्ति समता की सबसे बड़ी कमी है कि इसका इस्तेमाल करते हुए वस्तुओं एवं सेवाओं की गुणवत्ता (Quality) का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है, Purchasing Power Parity के आधार पर केवल किन्हीं दो देशों के बीच समान उत्पादों के कीमतों की तुलना करना ही संभव है उनकी गुणवत्ता की तुलना करना नहीं।

#2 गैर-व्यापार उत्पाद: PPP के द्वारा केवल समान वस्तुओं और सेवाओं की ही तुलना करी जा सकती है अतः पीपीपी Non-Tradable वस्तुओं और सेवाओं जैसे स्थानीय सेवाओं की कीमतों पर विचार नहीं करता है जो अलग-अलग देशों में काफी भिन्न हो सकती हैं और इस आधार पर उन देशों में रहन-सहन का खर्च PPP व्यवस्था से भिन्न भी हो सकता है।

#3 ट्रांसपोर्टेशन की लागत: क्रय शक्ति समता के तहत परिवहन की लागत को शामिल नहीं किया जाता है, यह वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती है। परिवहन लागत सामान्यतः अलग-अलग देशों में यहाँ तक कि किसी एक देश के भीतर ही विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से अलग हो सकती है और उत्पादों की वास्तविक कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

क्रय शक्ति एवं बाज़ार विनिमय दर में तुलना

नीचे कुछ देशों के मुद्राओं की क्रय शक्ति एवं बाज़ार विनिमय दर (Market Exchange Rate) की तुलना एक अमेरिकी डॉलर से की गयी है।

देश क्रय शक्ति बाज़ार विनिमय मूल्य 
भारत24.059 INR83.26 INR
चीन4.022 CNY7.31 CNY
सिंगापोर0.840 SGD1.37 SGD
रूस28.804 RUB97.31 RUB
जापान97.573 JPY149.74 JPY

सार-संक्षेप

क्रय शक्ति समता वह विनिमय दर है जिस पर एक देश की मुद्रा को दूसरे देश की मुद्रा में परिवर्तित करने पर प्रत्येक देश में समान उत्पाद और सेवाएँ खरीदी जा सकती हैं। पीपीपी एक महत्वपूर्ण मैट्रिक है क्योंकि यह विभिन्न देशों के जीवन स्तर की तुलना करने में अहम भूमिका निभाता है।

हालांकि क्रय शक्ति समता सिद्धांत की भी अपनी कुछ सीमाएं हैं उदाहरण के तौर पर किसी वस्तु या सेवा की गुणवत्ता को इसमें शामिल नहीं किया जाता है। यह केवल किन्हीं दो देशों के बीच समान उत्पादों के कीमतों की तुलना करता है उनकी गुणवत्ता को नहीं।

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