Wednesday, April 2, 2025

स्टॉक स्प्लिट क्या है और इससे निवेशकों को क्या फायदा होता है?

स्टॉक स्प्लिट कंपनी के शेयरों को एक से अधिक हिस्सों में विभाजित करने की प्रक्रिया को कहा जाता है। यह विभाजन एक निश्चित अनुपात में अधिकांश परिस्थितयो में किया जाता है जैसे 2:1, 3:1, 5:1 आदि।

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आपने स्टॉक मार्केट से संबंधित खबरों में अक्सर सुना होगा कि, किसी कंपनी ने अपने स्टॉक स्प्लिट (Stock Split) करने का फैसला लिया है, क्या आप जानते हैं आखिर स्टॉक स्प्लिट क्या होता है?

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शेयर मार्केट से जुड़े आज के इस लेख में आसान शब्दों में समझने की कोशिश करेंगे स्टॉक स्प्लिट क्या होता है, यह कैसे काम करता है, कोई कंपनी स्टॉक स्प्लिट क्यों करती है तथा स्टॉक स्प्लिट से कंपनी के निवेशकों को क्या फायदा या नुकसान होता है।

स्टॉक स्प्लिट क्या है?

स्टॉक स्प्लिट जैसा कि इसके नाम से पता चलता है कंपनी के शेयरों को एक से अधिक हिस्सों में विभाजित करने की प्रक्रिया को कहा जाता है। यह विभाजन एक निश्चित अनुपात अधिकांश परिस्थितयो में 2:1, 3:1, 5:1 या 10:1 में किया जाता है, यहाँ X : Y का अर्थ Y के बदले X शेयर है।

स्टॉक स्प्लिट की प्रक्रिया में कंपनी के आउटस्टैंडिंग शेयर्स की संख्या एक खास अनुपात से बढ़ जाती है, जबकि सभी आउटस्टैंडिंग शेयर्स का कुल मूल्य पहले के समान ही रहता है। किसी कंपनी द्वारा स्टॉक स्प्लिट करने के पीछे मुख्य उद्देश्य शेयर बाजार में उस स्टॉक की तरलता (Liquidity) को बढ़ाना होता है।

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गौरतलब है कि, स्टॉक की लिक्विडिटी का मतलब उस स्टॉक को खरीदना या बेचना कितना आसान है इस बात से है। उदाहरण के तौर पर किसी स्टॉक की लिक्विडिटी जितनी अधिक होती है, उसे खरीदना या बेचना बिना उसकी कीमत पर अधिक असर डाले उतना ही आसान होगा।

स्टॉक स्प्लिट कैसे काम करता है?

स्टॉक स्प्लिट कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली एक वित्तीय रणनीति है, जिसमें कंपनियाँ अपने शेयरधारकों को अतिरिक्त शेयर जारी करती हैं।

स्टॉक स्प्लिट (Stock Split) के पश्चात शेयरधारकों के पोर्टफोलियो में उस कंपनी के कुल शेयर, निर्दिष्ट अनुपात जैसे 2:1 या 3:1 से बढ़ जाते हैं। हालांकि शेयरधारकों के स्वामित्व का प्रतिशत और कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पहले जितना ही रहता है।

स्टॉक स्प्लिट क्यों किया जाता है?

कंपनियाँ अपने स्टॉक को विभाजित (Split) करने का विकल्प इसलिए चुनती हैं, ताकि इसकी ट्रेडिंग कीमत को कम किया जा सके और पहले की तुलना में अधिक निवेशक कंपनी के स्टॉक्स में निवेश कर पाएं।

उदाहरण के लिए यदि किसी कंपनी के एक शेयर की कीमत ₹10,000 है, तो अधिकांश निवेशक उस कंपनी में निवेश नहीं कर सकेंगे, इसके अलावा यदि कोई मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेचना चाहे तो उसे तत्काल खरीदार मिलने में भी मुश्किलें आएंगी।

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लेकिन यदि कंपनी 10:1 के अनुपात में (1 के बदले 10 शेयर) स्टॉक स्प्लिट कर दे तो कंपनी का एक शेयर 10 शेयरों में विभाजित हो जाएगा और एक नये शेयर की कीमत 1,000 रुपये हो जाएगी।

इस प्रकार नये निवेशकों के लिए कंपनी के शेयर खरीदना आसान हो जाएगा वहीं पुराने निवेशक भी बिना किसी परेशानी के अपने शेयर बेच सकेंगे। इसलिए जब किसी कंपनी के शेयर की कीमत बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो कंपनी स्टॉक की लिक्विडिटी को बढ़ाने के लिए स्टॉक स्प्लिट का रास्ता अपनाती है।

स्टॉक स्प्लिट कितने प्रकार का होता है?

  • स्टॉक स्प्लिट निम्नलिखित दो प्रकार से किया जा सकता है

फॉरवर्ड स्प्लिट (Forward Split): फॉरवर्ड स्प्लिट में शेयरों की संख्या को बढ़ा दिया जाता है, इससे स्टॉक्स की कीमत स्प्लिट के अनुपात के अनुसार कम हो जाती है और स्टॉक की तरलता पहले की तुलना में अधिक हो जाती है। सामान्यतः जब स्टॉक स्प्लिट की बात करी जाती है तो उसका आशय इसी प्रकार से होता है।

रिवर्स स्प्लिट (Reverse Split): पहले प्रकार के विपरीत रिवर्स स्टॉक स्प्लिट की स्थिति में कंपनी शेयरों की संख्या को एक निर्धारित अनुपात में कम कर देती है। इससे शेयरों की कीमत स्प्लिट के अनुपात में बढ़ जाती है, रिवर्स स्प्लिट तब किया जाता है जब स्टॉक की कीमत को बढ़ाने की जरूरत होती है।

स्टॉक स्प्लिट के क्या फायदे हैं?

स्टॉक स्प्लिट (Stock Split) किसी कंपनी के लिए कई मायने से फायदेमंद साबित हो सकता है, इनमें से कुछ महत्वपूर्ण फायदे निम्नलिखित हैं

स्टॉक्स की तरलता (Liquidity) बढ़ाना: स्टॉक्स स्प्लिट का सबसे बड़ा फायदा, जिसकी हमनें ऊपर भी चर्चा करी वह स्टॉक की तरलता या लिक्विडिटी को बढ़ाना है। स्टॉक स्प्लिट होने से शेयर की कीमत घट जाती है, लिहाजा छोटे निवेशकों के लिए शेयर खरीदना आसान हो जाता है।

निवेशक आधार बढ़ाना: स्टॉक स्प्लिट होने से कंपनी के शेयर सस्ते हो जाते हैं और निवेशकों को वे अधिक किफायती लगते हैं। इससे पहले की तुलना में अधिक लोग कंपनी में निवेश कर पाते हैं परिणामस्वरूप कंपनी का निवेशक आधार (Investor Base) बढ़ता है।

बाजार में सकारात्मक संकेत: जब कोई कंपनी स्टॉक स्प्लिट का निर्णय लेती है तो इसे बाजार द्वारा एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जाता है। स्टॉक स्प्लिट की प्रक्रिया दिखाती है कि, उस कंपनी का प्रबंधन अपने भविष्य के बारे में आशावादी है।

स्टॉक स्प्लिट का निवेशकों पर प्रभाव

स्टॉक स्प्लिट क्या होता है तथा कंपनियाँ स्टॉक स्प्लिट क्यों करती हैं यह जानने के बाद आइए अब समझते हैं कि, विभिन्न स्टॉक स्प्लिट का किसी कंपनी के निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

स्टॉक स्प्लिट से कंपनी के शेयरों की कीमत विभाजन के अनुपात में कम हो जाती है, जबकि शेयरों की संख्या विभाजन के ही अनुपात में बढ़ जाती है। इसके अलावा इसका निवेशक के पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू एवं कंपनी के बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

\[ \text{Market Capitalization} = (\text{Total Outstanding Shares of the Company}) \times (\text{Price of One Share of the Company}) \]

सार-संक्षेप

स्टॉक स्प्लिट एक सामान्य वित्तीय रणनीति है, जिसका इस्तेमाल कंपनियाँ अपने शेयर की कीमत को संशोधित करने और बाजार में स्टॉक की तरलता (Liquidity) को बढ़ाने के लिए करती हैं। ध्यान दें इससे कंपनी के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है।

हालांकि स्टॉक स्प्लिट की प्रक्रिया निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि स्टॉक की कीमत कम होने के चलते उसकी मांग पहले की तुलना में बढ़ जाती है, जिससे उसकी कीमतों में वृद्धि दिखाई देती है।

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