एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) क्या है और क्या काम करती है?

एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) क्या है?

एसेट मैनेजमेंट कंपनी (Asset Management Company) जैसा कि, इसके नाम से स्पष्ट होता है एक ऐसी फर्म है जो किसी व्यक्ति या संगठनात्मक निवेशकों के पैसे को निवेश के अलग-अलग विकल्पों जैसे स्टॉक्स, बॉन्ड, डिबेंचर्स, रियल एस्टेट, गोल्ड एवं सिल्वर आदि में निवेश करती है।

एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ मुख्य रूप से हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (HNI) पोर्टफोलियो, हेज फंड, पेंशन फंड्स, म्यूचुअल फंड्स, इंडेक्स या एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) आदि का मैनेजमेंट करती हैं। इन कंपनियों का प्राथमिक उद्देश्य समय के साथ अपने ग्राहकों की पूँजी को बढ़ाना होता है।

छोटे निवेशकों के पैसे का प्रबंधन करने के लिए एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ म्यूचुअल फंड्स, इंडेक्स या एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) की पेशकश करती हैं, जिसके चलते AMCs को सामान्यतः म्यूचुअल फंड कंपनी के रूप में भी जाना जाता है।

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के मुख्य कार्य

लेख की शुरुआत में हमनें जाना कि, एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) का मुख्य कार्य अपने ग्राहकों के पैसे का प्रबंधन करना है, ताकि उसमें समय के साथ अच्छी खासी ग्रोथ हो सके। इस कार्य के लिए AMCs के पास बाजार एवं अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में विशेष अनुभव रखने वाले पेशेवर लोगों की एक टीम होती है।

ये पेशेवर लोग कारगर निवेश रणनीति, बेहतर एसेट एलोकेशन, जोखिम का मूल्यांकन और जरूरी मार्केट रिसर्च कर निवेशकों को उच्च रिटर्न दिलाने की दिशा में काम करते हैं। आइए अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा प्रदान करी जाने वाली सेवाओं के बारे में चर्चा करते हैं

AMCs हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल एवं कुछ संस्थाओं के लिए पोर्टफोलियो बनाने और उसे प्रबंधित करने का काम करती हैं। पोर्टफोलियो विभिन्न प्रकार की फाइनेंशियल सिक्योरिटीज का एक कलेक्शन होता है, इसमें वे सभी इन्स्ट्रूमेंट्स शामिल होते हैं जिनमें किसी व्यक्ति / फर्म द्वारा निवेश किया गया है।

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चूँकि कुछ व्यक्तियों खासकर HNIs अथवा संस्थाओं को अर्थव्यवस्था एवं बाजार का विश्लेषण करने तथा उसकी गतिविधियों पर नजर रखने का पर्याप्त समय नहीं होता या वे किन्हीं कारणों से इन कार्यों को करने में असमर्थ होते हैं लिहाजा वे पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के लिए AMCs की सेवा ले सकते हैं। ये कंपनियाँ अपने क्लाइंट्स के पोर्टफोलियो से जुड़े सभी निर्णय लेती हैं जैसे कब कौन सी सिक्योरिटी को पोर्टफोलियो में शामिल किया जाए अथवा कब किसे बाहर निकाला जाए।

एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ साधारण निवेशकों को पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अलग-अलग प्रकार के फंड्स का निर्माण करती हैं, जिनमें म्यूचुअल फंड्स प्रमुख हैं। म्यूचुअल फंड्स में इसके नाम के अनुरूप हजारों-लाखों छोटे बड़े निवेशक एक कॉमन फंड का निर्माण करते हैं और इस फंड को AMC द्वारा नियुक्त फंड मैनेजर द्वारा अलग-अलग विकल्पों में निवेश किया जाता है।

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एसेट मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा ये फंड अलग-अलग जोखिम स्तर एवं उद्देश्यों को देखते हुए बनाए जाते हैं, उदाहरण के लिए Equity Funds ऐसे निवेशकों के लिए होते हैं जो अधिक जोखिम लेने में सक्षम हैं क्योंकि इनका अधिकांश पैसा स्टॉक्स में निवेशित होता है इस कारण यहाँ लाभ एवं जोखिम दोनों अधिक होते हैं। वहीं Debt Funds जिनका पैसा सुरक्षित विकल्पों जैसे सरकारी बॉन्ड आदि में निवेशित होता है सुरक्षित निवेश का विकल्प चाहने वाले व्यक्तियों के लिए बनाया जाता है।

एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ पोर्टफोलियो प्रबंधन के साथ-साथ निवेश से जुड़ी सलाह (Investment Advice) भी मुहैया करवाती हैं। कोई इंडिविजुअल AMCs को अपने पोर्टफोलियो के प्रबंधन का काम सौंप सकता है अथवा AMCs से सलाह लेकर स्वयं अपने पोर्टफोलियो का प्रबंधन कर सकता है।

इन कंपनियों द्वार दी जाने वाली सलाह में बाजार के ट्रेंड का विश्लेषण, निवेश की रणनीति, जोखिम का मूल्यांकन, निवेश से जुड़ी सिफारिशें आदि शामिल होती हैं।

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों का शुल्क

एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ अपने क्लाइंट्स से प्रदान करी गई सेवाओं के लिए शुल्क वसूलती हैं जिसे Asset Management Fee कहा जाता है। यह सामान्यतः क्लाइंट्स के कुल AMU यानी Asset Under Management का कुछ फीसदी होता है। एसेट मैनेजमेंट शुल्क की गणना वार्षिक आधार पर होती है लेकिन इसका भुगतान मासिक रूप से किया जाता है।

उदाहरण के लिए यदि कोई AMC एक करोड़ के फंड का प्रबंधन कर रही है जिस पर वह 1 फीसदी का शुल्क लेती है तो वह सालाना 1 लाख रुपये का शुल्क वसूलेगी, चूँकि किसी भी पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू हमेशा घटती-बढ़ती रहती है अतः 1% वार्षिक के आधार पर शुल्क का भुगतान मासिक रूप से किया जाएगा। कंपनी द्वारा लिए जाने वाले इस शुल्क से फंड प्रबंधन की लागत समेत अन्य परिचालन खर्चों की भरपाई करी जाती है।

AMC के माध्यम से निवेश करने के फायदे एवं नुकसान

एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ निवेशकों की ओर से उनके निवेश पोर्टफोलियो का प्रबंधन और देखरेख करती हैं और वित्तीय क्षेत्र में अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। किसी भी वित्तीय सेवा की तरह, AMCs के माध्यम से निवेश करने के भी अपने फायदे और नुकसान हैं, आइए इन्हें एक-एक कर समझते हैं।

AMC के माध्यम से निवेश करने के फायदे

स्वयं अपने पोर्टफोलियो को मैनेज करने के बजाए AMCs के माध्यम से निवेश करना कई मायनों में फायदेमंद है। एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ अनुभवी फंड मैनेजरों और वित्तीय पेशेवरों को नियुक्त करती हैं जिनके पास बाजार का विश्लेषण करने, सही निवेश निर्णय लेने और पोर्टफोलियो प्रबंधित करने में विशेषज्ञता होती है और यह विशेषज्ञता निवेश के बेहतर परिणाम लाने में निश्चित रूप से मदद करती है।

AMCs के पास किसी व्यक्तिगत निवेशक की तुलना में निवेश करने के लिए बहुत अधिक पूँजी होती है, जिसके चलते वे निवेशकों को एक डायवर्सिफाइड इन्वेस्टमेंट ऑप्शन प्रदान करते हैं। इसके अलावा AMCs बड़ी मात्रा में स्टॉक्स, बॉन्ड आदि में निवेश करती हैं जिसके चलते उन्हें सामान्यतः ऐसे फाइनेंशियल इन्स्ट्रूमेंट्स की खरीद पर कुछ हद तक छूट भी मिलती है।

AMC के माध्यम से निवेश करने के नुकसान

AMCs के माध्यम से निवेश करने के नुकसान की बात करें तो यह बेहद कम हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को दिया जाने वाला शुल्क है, जो यदि पोर्टफोलियो का साइज बड़ा हो तो अच्छा खासा हो सकता है। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि, पेशेवर लोगों द्वारा पोर्टफोलियो का मैनेजमेंट करने के पश्चात भी निवेश में जोखिम की संभावना बनी ही रहती है।

AMCs आपके पोर्टफोलियो की कुल वर्तमान वैल्यू पर मैनेजमेंट शुल्क लेती हैं, इस प्रकार ये भी आपके इन्वेस्टमेंट में कुछ फीसदी की हिस्सेदार हो जाती हैं। AMCs के माध्यम से निवेश करने के एक अन्य नुकसान को देखें तो इनके माध्यम से निवेश करने पर निवेशक के पास अपने पोर्टफोलियो का बहुत सीमित नियंत्रण रहता है।

सार-संक्षेप

एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ (Assets Management Companies) ऐसी फर्म हैं जो किसी इंडिविजुअल, संगठन या व्यक्तियों के कॉमन फंड (म्यूचुअल फंड्स अथवा ETFs) को अलग-अलग विकल्पों में निवेश करती हैं और समय के साथ उनकी पूँजी को बढ़ाने में मदद करती हैं।

इन कंपनियों के पास अनुभवी पेशेवर लोगों की एक टीम होती है जो किसी साधारण निवेशक की तुलना में अधिक कुशलता के साथ फंड मैनेजमेंट करने में सक्षम होते हैं, देश की कुछ प्रमुख AMCs में निम्नलिखित हैं

  • HDFC AMC Limited
  • ICICI Prudential Asset Management Company Limited
  • SBI Funds Management Private Limited
  • Reliance Nippon Life Asset Management Limited
  • Franklin Templeton Asset Management (India) Private Limited
  • UTI AMC Limited
  • Kotak Mahindra AMC Limited
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