Exchange Traded Funds (ETFs): ETF क्या हैं और इनमें निवेश कैसे करें?

एक्सचेंज ट्रेडेड फंड या ETF क्या है?

एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड अथवा ETF एक प्रकार के सामूहिक फंड होते हैं, जिन्हें इक्विटी, सूचकांक (जैसे सेंसेक्स, निफ्टी), सेक्टर (जैसे आईटी, हेल्थकेयर, FMCG), कमोडिटी (जैसे सोना, चाँदी, क्रूड ऑयल), बॉन्ड या किसी अन्य प्रकार की परिसंपत्ति में निवेश किया जाता है। ETFs जैसा कि, इसके नाम से भी साफ होता है स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड किये जाते हैं अतः इन्हें किसी स्टॉक की तरह खरीदा या बेचा जा सकता है।

समय के साथ एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) वित्तीय बाजारों में निवेश का एक लोकप्रिय विकल्प बनते जा रहे हैं, ये निवेशकों को परिसंपत्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला में निवेश करने का शानदार अवसर प्रदान करते हैं।

उदाहरण के लिए किसी इंडेक्स ईटीएफ में निवेश करने पर निवेशक का पैसा उस इंडेक्स में शामिल सभी कंपनियों में निवेशित हो जाता है, जो इंडेक्स की सभी कंपनियों में अलग से निवेश करने की तुलना में कहीं अधिक सरल और कम लागत वाला है।

म्यूचुअल फंड भी निवेशकों को किसी विशेष इंडेक्स, सेक्टर आदि में निवेश करने का मौका देते हैं इस प्रकार एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) कुछ मायनों में किसी म्यूचुअल फंड के समान ही हैं, किन्तु म्यूचुअल फंड और ETFs के बीच कुछ बुनियादी अंतर भी हैं जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे।

ETF कैसे काम करते हैं?

ETF की कार्यप्रणाली बहुत हद तक किसी स्टॉक के समान है, जैसे कोई कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होने के लिए अपना आईपीओ (Initial Public Offering) लेकर आती है उसी प्रकार ETF या एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ ETF लॉन्च करने के लिए न्यू फंड ऑफर या NFO लेकर आती है।

कोई भी EFT कंपनी किसी अंतर्निहित एसेट (Underlying Asset) का चुनाव करते हुए प्रतिभूतियों (Securities) की एक बास्केट का निर्माण करती है। ये बास्केट किसी सूचकांक, सेक्टर, कमोडिटी या परिसंपत्ति का प्रतिनिधित्व कर सकती है, उदाहरण के लिए निफ्टी इंडेक्स की बास्केट में इंडेक्स की सभी कंपनियों को इंडेक्स के ही अनुपात में शामिल किया जाएगा।

इसके पश्चात कंपनी इस बास्केट या फंड का पब्लिक इश्यू (NFO) लेकर आती है और निवेशक आईपीओ की तरह इसके लिए आवेदन करते हैं, यह प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद फंड स्टॉक एक्सचेंज में किसी शेयर की तरह लिस्ट हो जाता है और अब ETF को किसी कंपनी के शेयरों की तरह खरीदा या बेचा जा सकता है।

ETF कितने प्रकार के होते हैं?

एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स को प्रबंधन तथा अंतर्निहित परिसंपत्ति (Underlying Asset) के अनुसार अलग-अलग प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिनके बारे में यहाँ विस्तार से बताया गया है-

ETFs के प्रबंधन के लिहाज से इन्हें मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है, इनमें एक्टिव ETF तथा पैसिव ETF शामिल हैं। एक्टिव ETF अथवा सक्रिय रूप से प्रबंधित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, ऐसे फंड्स होते हैं जहाँ फंड मैनेजर किसी विशिष्ट बेंचमार्क जैसे इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन करने के उद्देश्य से सक्रिय रूप से निवेश से जुड़े निर्णय लेते हैं।

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इसके विपरीत पैसिव ETF ऐसे फंड हैं जहाँ सक्रिय रूप निवेश से जुड़े निर्णय नहीं लिए जाते, ये फंड किसी बेंचमार्क के प्रदर्शन को ही फॉलो करते हैं।

उदाहरण के तौर पर सेंसेक्स (SENSEX) से जुड़े किसी पैसिव ETF का रिटर्न सेंसेक्स के समान ही होगा, जबकि सेंसेक्स से जुड़े एक्टिव ETF में फंड मैनेजर सेंसेक्स से बेहतर रिटर्न पाने के उद्देश्य से समय-समय पर फंड में उचित बदलाव करेंगे। गौरतलब है कि अधिकांश ETF पैसिव प्रकृति के ही होते हैं।

अंतर्निहित परिसंपत्ति के अनुसार ETF कई प्रकार के हो सकते हैं जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं-

इंडस्ट्री / सेक्टर ETF: सेक्टर या किसी इंडस्ट्री से जुड़े ETF ऐसे फंड होते हैं जो किसी खास सेक्टर पर केंद्रित होते हैं, उदाहरण के लिए आईटी सेक्टर से जुड़े ETF में इस क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों को शामिल किया जाएगा। इस प्रकार के फंड का उद्देश्य किसी समूचे सेक्टर के प्रदर्शन से लाभ कमाना होता है।

कमोडिटी ETF: ये ऐसे फंड हैं जो मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की कमोडिटी को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करते हैं जैसे सोना, चाँदी, क्रूड ऑयल इत्यादि।

बॉन्ड ETF: बॉन्ड ईटीएफ निश्चित आय वाली प्रतिभूतियों जैसे कॉर्पोरेट अथवा सरकारी बॉन्ड में निवेश करते हैं, इनमें निवेश कर कोई निवेशक व्यक्तिगत रूप से बॉन्ड खरीदे बिना बॉन्ड मार्केट का अनुभव प्राप्त कर सकता है।

अन्य ETF: इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाले कुछ अन्य प्रकारों में करेंसी ईटीएफ, स्टाइल ईटीएफ, इंटरनेशनल ईटीएफ, इनवर्स और लीवरेज ईटीएफ, बिटकॉइन ईटीएफ आदि शामिल हैं।

ETF में निवेश कैसे करें?

जैसा कि, हम ऊपर बता चुके हैं एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदे या बेचे जाते हैं, अतः यदि आप ETFs में निवेश करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक डी-मैट खाते की आवश्यकता होगी, जिसे आप Zerodha या किसी अन्य ब्रोकरेज फर्म के साथ खुलवा सकते हैं। इसके पश्चात आप किसी स्टॉक की भांति आपने पसंदीदा ETF में निवेश कर सकते हैं।

ETF में निवेश करने से पहले ध्यान देने योग्य बातें

यदि आप किसी एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड या ETF में निवेश करने की सोच रहे हैं तो ऐसा करने से पहले आपको कुछ विशेष बातों को ध्यान में रखने की जरूरत है-

#1 अंतर्निहित एसेट: निवेश करने के लिए किसी ETF का चुनाव करने से पहले उस अंतर्निहित एसेट या बेंचमार्क का चुनाव करें जिसमें आप निवेश करना चाहते हैं जैसे कोई सेक्टर, इंडेक्स, बॉन्ड, कमोडिटी, करेंसी आदि।

#2 ट्रेडिंग वॉल्यूम: किसी भी ETF में निवेश करने से पहले उसका ट्रेडिंग वॉल्यूम चैक करना बेहद जरूरी है, यह इस बात की जानकारी देता है कि वह एक्सचेंज पर ETF कितना अधिक ट्रेड किया जाता है अथवा कितना पॉपुलर है। अधिक ट्रेड किये जाने वाले ETF तरलता (Liquidity) के लिहाज से अच्छे होते हैं इन्हें आप जब चाहें बेच सकते हैं।

#3 एक्सपेंस रेशियो: एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) किसी म्यूचुअल फंड या ETF का प्रबंधन शुल्क होता है, जो निवेशकों से वसूला जाता है अतः ETF में निवेश करने से पहले इसे जाँचना जरूरी हो जाता है, किसी फंड में यह जितना कम होगा निवेशक को उतना अधिक फायदा होगा।

ETF में निवेश करने के फायदे और नुकसान

किसी भी इनवेस्टमेंट ऑप्शन की तरह ETF में निवेश करने के भी अपने फायदे और नुकसान हैं। यहाँ निवेश करने के कुछ मुख्य फायदे और नुकसान निम्नलिखित हैं-

ETF में निवेश के फायदे ETF में निवेश के नुकसान
ETFs निवेशकों को किसी समूचे सेक्टर या इंडेक्स में निवेश करने का विकल्प देते हैंईटीएफ बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव के अधीन होते हैं अतः अंतर्निहित परिसंपत्तियों के प्रदर्शन के आधार पर उनका मूल्य भी ऊपर या नीचे जा सकता है।
ऐसे निवेशक जो आर्थिक रूप से किसी स्टॉक में निवेश करने में सक्षम नहीं हैं, ETF के जरिए ऐसे स्टॉक में निवेश कर सकते हैंऐसे ETF जिनका उद्देश्य किसी इंडेक्स को फॉलो करना है वे Tracking Error के चलते इंडेक्स के जितना रिटर्न नहीं दे पाते हैं, अर्थात फंड का प्रदर्शन इंडेक्स से भिन्न हो सकता है
अधिकांश पारंपरिक म्यूचुअल फंड की तुलना में बेहद कम एक्सपेंस रेशियोसक्रिय ETF द्वारा लिया जाने वाला अधिक प्रबंधन शुल्क इसका एक और नकारात्मक पहलू है
ETF सामान्यतः फाइनेंशियल इन्स्ट्रूमेंट्स की एक बास्केट होते हैं अतः ये निवेशकों को एक डायवर्सिफाइड इनवेस्टमेंट ऑप्शन देते हैंETF में निवेश करने पर निवेशक के पास अपने पोर्टफोलियो का सीमित नियंत्रण रहता है
चूँकि ETF स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेड होते हैं अतः अधिकांशतः इनमें निवेश करना तरलता या Liquidity के लिहाज से अच्छा हैम्यूचुअल फंड के विपरीत ETFs सेकेंडरी मार्केट में ट्रेड होते हैं अतः कुछ ETF में तरलता बहुत कम होती है

ETF और म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है?

हालांकि एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड और म्यूचुअल फंड बहुत हद तक एक जैसे मालूम होते हैं, लेकिन ये दोनों कई मायनों में एक दूसरे से भिन्न हैं। आइए इन दोनों के मध्य कुछ मुख्य अंतरों को समझते हैं-

एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF)म्यूचुअल फंड
ETFs स्टॉक एक्सचेंज जैसे NSE या BSE में ट्रेड किये जाते हैं म्यूचुअल फंड को एसेट मैनेजमेंट कंपनी से खरीदा जा सकता है
ETF का आकार एक्सचेंज में लिस्ट हो जाने के बाद परिवर्तित नहीं होता हैम्यूचुअल फंड का आकार नए निवेशकों के जुड़ने या पुराने निवेशकों के बाहर निकलने से कम या ज्यादा हो सकता है
ईटीएफ के एक यूनिट की कीमत पूरे फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) से अधिक या कम हो सकती हैम्यूचुअल फंड की कीमत फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) के बराबर ही होती है
ETF स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेड होते हैं अतः इनकी कीमतें स्टॉक्स की तरह रियल टाइम में परिवर्तित होती हैंम्यूचुअल फंड्स में NAV की गणना बाजार बंद होने के पश्चात होती है अतः इसकी कीमतें बाजार के साथ परिवर्तित नहीं होती
ETF सामान्यतः म्यूचुअल फंड से सस्ते होते हैं अधिकांश म्यूचुअल फंड ETF की तुलना में महँगे होते हैं
चूँकि ETF सेकेंडरी मार्केट में किसी वस्तु के तौर पर ट्रेड होते हैं अतः इन्हें नकदी के लिए भुनाया नहीं जा सकताम्यूचुअल फंड शेयरों को उस दिन के लिए फंड के NAV पर नकदी के लिए भुनाया जा सकता है।

सार-संक्षेप

एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड या ETF वर्तमान में निवेश का एक बेहतरीन विकल्प है, इसमें म्यूचुअल फंड की भांति एक सामूहिक फंड का निर्माण किया जाता है और इसे किसी इंडेक्स, सेक्टर, कमोडिटी इत्यादि में निवेश किया जाता है। हालांकि म्यूचुअल फंड के विपरीत ETFs स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेड किये जाते हैं। एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड सीमित बजट के साथ प्रतिभूतियों की एक विस्तृत श्रंखला में निवेश करने का एक प्रभावी तरीका है।

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