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फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) क्या है, इसके क्या कार्य हैं?

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आतंकवाद वर्तमान दौर में एक बहुत बड़ी वैश्विक समस्या बन चुका है, जिसे अनदेखा नहीं जा सकता। साल 2016 का उरी हमला हो या 2019 का पुलवामा हमला, भारत उन देशों की सूची में शामिल है जो आतंकवाद से खासा प्रभावित रहे हैं और लंबे समय से लगातार वैश्विक मंचों के माध्यम से इस समस्या को संबोधित भी करता रहा है।

आतंकवाद की गंभीरता को देखते हुए वैश्विक स्तर पर कई संस्थाएं अलग-अलग तरीकों से काम कर रही हैं और इन्हीं में एक फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) है, जो आतंकवाद जैसी घटनाओं के वित्तपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग जैसे क्रियाकलापों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कार्य करती है। इस लेख में जानेंगे फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स क्या है तथा कैसे काम करती है।

फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) क्या है?

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग तथा टेररिस्ट फाइनेंसिंग जैसी घटनाओं की निगरानी के लिए एक संस्था है। यह एक अंतर-सरकारी निकाय हैं, जो इन अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों को निर्धारित करता है। FATF का उद्देश्य आतंकवाद तथा मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों एवं इनसे समाज को होने वाले नुकसान को रोकना है।

FATF सरकारों को अवैध ड्रग्स, मानव तस्करी और अन्य अपराधों में इस्तेमाल होने वाले पैसे का पता लगाने में मदद करता है। यह सामूहिक विनाश के हथियारों के लिए फंडिंग को रोकने के लिए भी काम कर रहा है। टास्क फोर्स मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकवादी वित्तपोषण के विभिन्न तकनीकों की समीक्षा करता है और इनसे उत्पन्न नए खतरों को संबोधित करने के लिए अपने मानकों को लगातार मजबूत करता है। उदाहरण के लिए क्रिप्टोकरेंसी आदि का रेगुलेशन इत्यादि।

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एफएटीएफ यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न देशों की निगरानी करता है, कि वे एफएटीएफ मानकों को पूर्ण रूप एवं प्रभावी ढंग से लागू कर रहे हैं अथवा नहीं। इसके अतिरिक्त यह उन देशों को सूचीबद्ध करता है जो इसके मानकों का अनुपालन नहीं करते हैं।

200 से अधिक देश वर्तमान में FATF की नीतियों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नीति बनाने वाली संस्था के रूप में FATF नियामक सुधार लाने के लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति पैदा करने का भी काम करता है। FATF द्वारा कुछ मानक विकसित किए हैं, जो संगठित अपराध, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को रोकने के लिए एक समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करते हैं।

FATF का इतिहास

एफएटीएफ (Financial Action Task Force) की स्थापना मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से G7 देशों की पहल पर 1989 में की गई, बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय संस्थानों के लिए उत्पन्न खतरे को स्वीकार करते हुए, G-7 राष्ट्राध्यक्षों एवं यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष ने G-7 सदस्य देशों, यूरोपीय आयोग और आठ अन्य देशों के साथ टास्क फोर्स का गठन किया। इसका मुख्यालय फ्रांस के पेरिस शहर में स्थित है।

साल 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 आतंकवादी हमले के चलते संस्था का ध्यान आतंकवाद की तरफ गया तथा इसने आतंकवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से होने वाली आर्थिक गतिविधियों पर भी कार्य करना शुरू किया, गठन के समय इसके केवल 11 सदस्य थे जो वर्तमान में बढ़कर 39 हो चुके हैं। अप्रैल 2012 में, इसने सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के वित्तपोषण को रोकने के लिए भी कार्यक्रम तैयार किया।

FATF के क्या कार्य हैं?

FATF की स्थापना के मुख्य उद्देश्य को हमनें ऊपर समझा, जो कि अवैध गतिविधियों के वित्तपोषण को रोकना है। FATF द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण आदि के लिए आवश्यक मानक निर्धारित किए हैं, जिनका पालन करना विभिन्न देशों के लिए अनिवार्य है।

अप्रैल 1990 में, इसकी स्थापना के कुछ महिनों बाद FATF ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें मुख्यतः चालीस सिफारिशें शामिल की गई थी। इनका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ लड़ने के लिए आवश्यक एक व्यापक कार्य योजना प्रदान करना था।

1990 में जारी इन सिफारिशों को वैश्विक स्तर पर एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग के लिए विश्व मानक के रूप में देखा जाता है तथा अधिकांश देशों ने इन सभी चालीस सिफारिशों को लागू करने की प्रतिबद्धता भी जताई है। ये सिफारिशें आपराधिक न्याय प्रणाली एवं कानून प्रवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, और वित्तीय प्रणाली तथा इसके विनियमन से जुड़ी हैं।

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FATF ने समय-समय पर इन सिफारिशों को संशोधित किया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए अपनाई जाने वाली तकनीकों के बदलाव के अनुरूप FATF नीतियों का निर्माण कर सके, FATF ने आतंकवादी वित्तपोषण पर भी नौ विशेष सिफारिशें जारी की हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका में 11 सितंबर के आतंकवादी हमले के बाद अक्टूबर 2001 में एफएटीएफ ने आतंकवाद के वित्तपोषण पर आठ विशेष सिफारिशें जारी कीं। उपायों में विशेष रूप से गैर-लाभकारी संगठनों को लक्षित किया गया तथा गैर-लाभकारी संगठनों के माध्यम से वित्तीय दुरुपयोग का मुकाबला करने पर जोर दिया गया।

अक्टूबर 2004 में FATF ने नौवीं विशेष सिफारिश प्रकाशित की, जो आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने के लिए निर्मित अंतर्राष्ट्रीय मानकों को और मजबूत करती है। इस प्रकार FATF की कुल 49 सिफारिशें हैं, जिनमें समय-समय पर संशोधन किया जाता रहा है। ये सिफारिशें इन वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रों को एक मार्गदर्शन उपलब्ध करवाती हैं।

FATF के विभिन्न निकाय

FATF Plenary फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स का निर्णायक निकाय है, इसमें सभी सदस्य देशों तथा क्षेत्रीय निकायों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। FATF का ये अधिवेशन वर्ष में 3 बार क्रमशः फरवरी, जून एवं अक्टूबर माह में आयोजित किया जाता है, जिसमें विभिन्न देशों को FATF के मानकों के क्रियान्वयन के आधार पर सूचीबद्ध किया जाता है।

इसके अतिरिक्त एफएटीएफ द्वारा अन्य मुद्दों जैसे नई नीतियों एवं दिशानिर्देशों के निर्माण, वित्तीय तंत्र से संबंधित नए खतरों आदि पर भी फैसले लिए जाते हैं। FATF Plenary के अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्रुप या संयुक्त रूप से वर्किंग ग्रुप सभी प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर अलग अलग मुद्दों पर नीति निर्माण का कार्य करते हैं, जिसे अंतिम मंजूरी Plenary द्वारा दी जाती है।

FATF की नीतियों को प्रभावी बनाने हेतु राष्ट्रों को निर्देश

मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण एवं विनाशकारी हथियारों के लिए होने वाले वित्तपोषण को रोकने हेतु FATF द्वारा विभिन्न राष्ट्रों की सरकारों के लिए कुछ निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

  • गैर-कानूनी क्रियाकलापों के लिए हो रही आर्थिक गतिविधियों की पहचान कर उन्हें आपराधिक बनाना एवं प्रवर्तन अधिकारियों को आवश्यक शक्तियों एवं संसाधनों से युक्त करना।
  • अपराधियों को उनकी आपराधिक आय और उनकी अवैध गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए आवश्यक संसाधनों से वंचित करना।
  • AML या एंटी मनी लॉन्ड्रिंग नीतियों को लागू करने में व्यक्तियों और संस्थाओं की आवश्यक सीमा को सुनिश्चित करना।
AML नीतियों के अंतर्गत शामिल हैं

(i) ग्राहकों की सही पहचान करना तथा वैध व्यवसाय एवं आपराधिक गतिविधि के बीच के अंतर को समझकर अपराधियों को गुमनाम रूप से या झूठी पहचान के तहत काम करने से रोकना

(ii) व्यक्तियों एवं संस्थाओं की सटीक पहचान तथा उनके लेन-देन के रिकॉर्ड को प्रबंधित करना

(iii) ग्राहक संबंधों की निगरानी करना तथा किसी भी संदिग्ध लेन-देन की तुरंत प्रवर्तन अधिकारियों को रिपोर्ट करना

FATF की ग्रे लिस्ट

FATF इसके असहयोगी देशों अथवा इसके द्वारा बनाए गए मानकों पर खरा न उतरने वाले देशों को क्रमशः ब्लैक एवं ग्रे लिस्ट में शामिल करता है।

एफएटीएफ ग्रे लिस्ट में शामिल देश वे देश हैं जो औपचारिक तौर पर FATF के AML (Anti-Money Laundering) / CFT (Counter-Terrorism Financing) हेतु निर्मित मानकों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध तो हैं किन्तु मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकवाद के वित्तपोषण जैसी गतिविधियों को रोकने में विफल हैं।

किसी देश का ग्रे लिस्ट में डाला जाना भविष्य में उसे ब्लैक लिस्ट में डाले जाने के लिए एक चेतावनी के रूप में भी कार्य करता है। FATF द्वारा ग्रे लिस्ट में शामिल देशों को अधिक निगरानी में रखा जाता है। FATF स्वयं अथवा एफएटीएफ-शैली के अन्य क्षेत्रीय निकायों (FSRBs) का उपयोग करके ऐसे देशों द्वारा किए जा रहे AML/CFT लक्ष्यों की दिशा में की गई प्रगति की जाँच करता है।

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हालाँकि किसी देश को ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाना ब्लैक लिस्ट की तुलना में कम नुकसानदायक है, किन्तु ग्रे लिस्ट में शामिल होने से भी कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। ग्रे लिस्ट को नियमित रूप से अपडेट किया जाता है, इसमें नए देश जोड़े जाते हैं जबकि अपनी कार्य योजनाओं को पूरा करने वाले देशों को इससे हटा दिया जाता है।

जून 2024 में जारी की गई वर्तमान FATF ग्रे लिस्ट में बुल्गारिया, क्रोएशिया, फिलीपींस, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका, यमन, वियतनाम समेत 21 देश शामिल हैं।

FATF की ब्लैक लिस्ट

असहयोगी देश या क्षेत्र, जो गैर-कानूनी गतिविधियों के वित्तीयकरण का समर्थन करते हैं, उनको FATF की ब्लैक लिस्ट में शामिल किया जाता है। सूची का उद्देश्य न केवल वैश्विक मंच पर इन देशों को उजागर करना है, बल्कि ऐसे देशों द्वारा उत्पन्न मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवाद जैसे खतरों की चेतवानी देना भी है।

ब्लैक लिस्ट किए गए देशों को FATF की आधिकारिक रिपोर्टों द्वारा समय-समय पर अपडेट किया जाता है। देशों को उनके AML और CFT नियामक व्यवस्थाओं के आधार पर ब्लैक लिस्ट में जोड़ा अथवा हटाया जाता है। पहली FATF ब्लैक लिस्ट वर्ष 2000 में 15 देशों की प्रारंभिक सूची के साथ जारी की गई, तब से सूची को कई बार संशोधित किया गया है तथा वर्तमान में FATF ब्लैकलिस्ट में केवल तीन देश उत्तर कोरिया, म्यांमार एवं ईरान शामिल हैं।

ब्लैक लिस्ट में शामिल होना किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद हानिकारक है। ऐसे देश अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे आईएमएफ तथा विश्व बैंक से कोई ऋण प्राप्त नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा ऐसे देशों को अन्य देशों के साथ वित्तीय समझौतों को करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

FATF के सदस्य देश

FATF में वर्तमान में 39 सदस्य हैं, जिनमें 37 देशों समेत दो क्षेत्रीय संगठन शामिल हैं। ये देश दुनियाँ के सभी हिस्सों में सबसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इसके अतिरिक्त एक पर्यवेक्षक देश (इंडोनेशिया), Asia/Pacific Group on Money Laundering (APG), Eurasian Group (EAG), Financial Action Task Force of Latin America (GAFILAT) समेत 9 सहयोगी संस्थाएं तथा 20 से अधिक पर्यवेक्षक संस्थाएं हैं

इनमें African Development Bank, Asian Development Bank, Basel Committee on Banking Supervision, European Central Bank, World Bank, United Nations के विभिन्न निकाय, Interpol, World Customs Organization (WCO) आदि महत्वपूर्ण वैश्विक संगठन शामिल हैं।

भारत द्वारा उठाए गए कदम

भारत 2010 से ही FATF का सदस्य एवं पूर्ण सहयोगी रहा है तथा इसकी नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने समय-समय पर अपने Know Your Customer (KYC) मानदंड, AML/CFT मानकों पर नियामक दिशानिर्देश जारी किए हैं।