रेमिटेंस क्या होता है और किसी देश के लिए कितना जरूरी है?

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रेमिटेंस क्या होता है?

शाब्दिक तौर पर देखें तो रेमिटेंस (Remittance) वह पैसा है जिसे किसी एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को ट्रांसफर किया जाता है, यह ट्रांसफर आर्थिक मदद, बिल का भुगतान करने, गिफ्ट देने आदि के रूप में हो सकता है। रेमिटेंस शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द “Remittere” से हुई है जिसका अर्थ वापस भेजना (Send Back) होता है।

आमतौर पर रेमिटेंस शब्द का इस्तेमाल उस पैसे के लिए किया जाता है, जिसे विदेशों में काम करने वाले भारतीय अपने परिवार या संबंधियों को बैंक ट्रांसफर अथवा अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भेजते हैं।

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भारत दुनियाँ में सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों में है। आंकड़ों को देखें तो 2023 में भारत को 120 बिलियन डॉलर की धनराशि रेमिटेंस से प्राप्त हुई, जो दुनियाँ में किसी भी अन्य देश के मुकाबले अधिक थी। इसके अलावा साल 2022 की बात करें तो इस दौरान ये राशि 111 बिलियन डॉलर थी।

इस वर्ष यानी 2024 में इनवर्ड रेमिटेंस के 3.7% की दर से बढ़कर 124 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2025 में इसके 129 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

रेमिटेंस किसी देश के लिए कैसे फायदेमंद है?

रेमिटेंस किसी देश खासकर विकासशील देशों के लिए कमाई का एक महत्वपूर्ण जरिया है। इसके साथ ही यह किसी देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) को बढ़ाने में भी मदद करता है।

रेमिटेंस से आने वाला पैसा विदेशी मुद्रा में होता है जैसे डॉलर, UAE दिरहम, सऊदी रियाल इत्यादि। इसके बाद इसे करंट एक्सचेंज रेट पर भारतीय रुपए में बदला जाता है और प्राप्तकर्ता के बैंक खाते में जमा कर दिया जाता है। इस प्रकार रेमिटेंस से जहाँ आम लोगों की आर्थिक जरूरतें पूरी होती हैं वहीं देश का फॉरेक्स रिजर्व भी बढ़ता है।

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बता दें कि, विदेशी मुद्रा भंडार या फॉरेक्स रिजर्व किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। यह अंतर्राष्ट्रीय भुगतान करने, भुगतान संतुलन बनाए रखने तथा देश को किसी आर्थिक संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। मोटे तौर पर रेमिटेंस किसी देश के समग्र आर्थिक विकास को ही बढ़ावा देता है।

चूँकि रेमिटेंस का बहुत बड़ा हिस्सा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को जाता है लिहाजा इससे देश में आर्थिक समानता भी आती है। इसके अलावा रेमिटेंस से प्राप्त हुए पैसों का इस्तेमाल निम्न एवं मध्यम वर्ग के परिवार अपनी मूलभूत जरूरतों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य इत्यादि को पूरा करने के लिए करते हैं, जिससे उन्हें गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिलती है और उनका जीवन स्तर पहले से बेहतर होता है।

रेमिटेंस किन-किन तरीकों से आता है?

गौरतलब है कि, भारत को प्राप्त होने वाले रेमिटेंस में 100 फीसदी वह पैसा नहीं है जो भारतीय कामगार विदेशों से अपने परिवार या संबंधियों को ट्रांसफर करते हैं, बल्कि जैसा हमनें शुरुआत में बताया इसके तहत वो पैसा भी शामिल होता है जो किसी बिल के भुगतान या मानदेय (Remuneration) की एवज में विदेशों से प्राप्त हुआ हो।

उदाहरण के लिए यदि कोई भारतीय फ्रीलांसर, भारत में रहते हुए किसी विदेशी व्यक्ति या संस्था के लिए काम करता है और उसका भुगतान विदेश से प्राप्त करता है तो यह पैसा भी रेमिटेंस की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।

रेमिटेंस के प्रकार

रेमिटेंस इनवर्ड (Inward) तथा आउटवर्ड (Outward) दो तरीके से हो सकता है। जब विदेशों से रेमिटेंस के रूप में पैसा भारत में आता है तो इसे इनवर्ड रेमिटेंस कहा जाता है उदाहरण के लिए खाड़ी देशों में काम करने वाले कामगारों आदि का भारत में पैसा भेजना। वहीं इसके विपरीत यदि जब भारत से पैसा बाहर भेजा जाता है तो इसे आउटवर्ड रेमिटेंस कहा जाता है, उदाहरण के लिए विदेश में किया जाने वाला खर्च।

इन देशों से आता है सबसे अधिक रेमिटेंस

आरबीआई द्वारा किये गए एक सर्वे के अनुसार साल 2020-21 में भारत को लगभग 89.12 अरब डॉलर का रेमिटेंस प्राप्त हुआ, जिसका करीब 23.4 फीसदी अकेले अमेरिका (USA) से आया। अमेरिका के अलावा यूके, सिंगापुर, हांगकांग, जर्मनी तथा ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले हाई स्किल्ड भारतीयों द्वारा कुल रेमिटेंस का करीब 15% भेजा गया।

भारत में आने वाले रेमिटेंस का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत संयुक्त अरब अमीरात है, जहाँ से इस दौरान कुल रेमिटेंस का 18% प्राप्त हुआ। इसके अलावा UAE समेत सभी खाड़ी देशों की बात करें तो यहाँ से कुल रेमिटेंस का तकरीबन 28.6 फीसदी प्राप्त हुआ। इन देशों में UAE, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर जैसे देश शामिल हैं।

रेमिटेंस कैसे भेजा जा सकता है?

वर्तमान में देश के भीतर पेमेंट्स करने के लिए UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट सिस्टम एक बेहद सुविधाजनक विकल्प है जिसकी सहायता से बिना किसी शुल्क के तत्काल पैसे ट्रांसफर किये जा सकते हैं।

भारत के साथ-साथ अब कई अन्य देश भी UPI के माध्यम से पेमेंट्स स्वीकार कर रहे हैं। फिलहाल ऐसे देशों की संख्या 7 है जिनमें फ्रांस, सिंगापुर, UAE, भूटान, नेपाल, मॉरीशस जैसे देश शामिल हैं। इसके अलावा हाल ही में आरबीआई ने प्रोजेक्ट नेक्सस पर भी हस्ताक्षर किये हैं, जिससे क्रॉस बॉर्डर पेमेंट्स और आसान होगा।

उपरोक्त देशों से या इन देशों को सीधे UPI के द्वारा पैसे भेजे जा सकते हैं। इसके अलावा किसी अन्य देश में पैसे भेजने या दूसरे देश से पैसे मँगवाने के लिए PayPal, Skrill, Wise जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता हैं।

What Is a Remittance in Hindi

सार-संक्षेप

किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा अन्य व्यक्ति को भेजा गया पैसा रेमिटेंस (Remittance) कहलाता है। हालांकि रेमिटेंस का इस्तेमाल आमतौर पर केवल ऐसे पैसे के लिए किया जाता है, जिसे विदेशों में काम करने वाले भारतीय अपने परिवार या संबंधियों को वित्तीय सहायता, गिफ्ट्स आदि के रूप में भेजते हैं।

रेमिटेंस किसी विकासशील देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, यह ऐसे देशों के लिए आय और विदेशी मुद्रा का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है। रेमिटेंस से आम लोगों के पास पैसा आता है, जिससे उनका जीवन स्तर सुधरता है, लोग शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करते हैं और उनकी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।